Anti Corruption Trap Vandana Singh Meerut: मेरठ के परतापुर स्थित सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की प्राचार्य वंदना सिंह को एंटी करप्शन टीम ने 1.35 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया। टीम ने मौके पर कार्रवाई कर प्राचार्य का मेडिकल कराया। मेरठ में एंटी करप्शन विभाग ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए परतापुर स्थित सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की प्राचार्य वंदना सिंह को 1.35 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा।
कार्रवाई परतापुर के गंगोल रोड स्थित पराग कैटल फील्ड परिसर में स्थित संस्थान में की गई। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाकर प्राचार्य को कथित तौर पर रिश्वत लेते पकड़ा। जानकारी के अनुसार, संस्थान की प्राचार्य वंदना सिंह के खिलाफ एक व्यक्ति ने रिश्वत मांगने की शिकायत एंटी करप्शन विभाग से की थी। शिकायत की जांच के बाद टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई।
सोमवार को एंटी करप्शन विभाग के एक दर्जन से अधिक अधिकारी सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान पहुंचे। टीम ने कार्रवाई करते हुए प्राचार्य वंदना सिंह को 1.35 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ लिया। एंटी करप्शन टीम की प्रभारी अर्चना सिंह और दुर्गेश के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। टीम ने प्राचार्य वंदना सिंह का चिकित्सीय परीक्षण कराया और इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। एंटी करप्शन विभाग की टीम रिश्वत से जुड़े मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है। वहीं, शिकायत रिश्वत की रकम और मौके पर हुई कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
दरअसल, मेरठ में परतापुर स्थित सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की जिस प्रिंसिपल वंदना सिंह को एंटी करप्शन टीम ने 1.35 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि, संस्थान परिसर में संचालित कैंटीन के बिल पास करने के एवज में प्रिंसिपल ने कैंटीन संचालक से रिश्वत मांगी थी। कार्रवाई के बाद एंटी करप्शन टीम वंदना सिंह से पूछताछ कर रही है।
सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान में अमित सिवाच ठेके पर कैंटीन चलाते हैं। पिछले काफी समय से वह कैंटीन के बिलों का भुगतान कराने के लिए विभाग के चक्कर लगा रहे थे। आरोप है कि काफी प्रयास के बाद भी बिल पास नहीं हुए तो उन्होंने प्रिंसिपल वंदना सिंह से मुलाकात कर मदद मांगी।
आरोप है कि प्रिंसिपल ने बिल पास करने के बदले अमित सिवाच से 1.35 लाख रुपए की रिश्वत मांगी। साथ ही कथित तौर पर यह भी कहा गया कि रकम नहीं देने पर बिल पास नहीं किए जाएंगे और आगे कैंटीन का ठेका रिन्यू कराने में भी परेशानी खड़ी की जाएगी।