Highlights:
मिट्टी के दीए और फैंसी आइटम तैयार करने में जुटे स्थानीय कारीगर
बाजारों में बढ़ी लक्ष्मी गणेश जी की मूर्तियों की मांग
थापर नगर से सदर बाजार तक दिवाली की धूम
Designer Diyas In Meerut Market: दीपावली के पावन पर्व को लेकर मेरठ के बाजारों में इस बार बेहद आकर्षक और आधुनिक डिजाइन के दीये और मूर्तियां ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। पारंपरिक कला के साथ-साथ इस बार आधुनिकता का बेहतरीन फ्यूजन देखने को मिल रहा है, जिसकी वजह से बाजार पूरी तरह गुलजार हैं।
मेरठ के मुख्य बाजारों जैसे कि थापर नगर (मशहूर दिया मार्केट), सदर बाजार, आबूलेन, और जीआईसी मैदान में चल रहे खादी महोत्सव में तरह-तरह की वैरायटी देखने को मिल रही है। इस बार मेरठ के बाजारों में बिक रहे मुख्य आकर्षक दीयों और मूर्तियों की खासियतें विभिन्न प्रकार की है। स्थानीय प्रजापति समाज और कारीगरों ने मिट्टी के दीयों को नया रूप दिया है।
आपको बता दें कि इस बार रंग-बिरंगे और फ्लोरल डिजाइन वाले दीए पांच रुपए से लेकर ₹50 तक की रेंज में उपलब्ध हैं। घर के मुख्य द्वार को सजाने के लिए मिट्टी से बने बेहद खूबसूरत झूमर, तोरण, और 'शुभ-लाभ' के लटकन बिक रहे हैं, जिन पर बेहतरीन हैंड-पेंटिंग की गई है। वहीं अगर वैक्स और जेल वाले रेडीमेड दीए की बात करें तो तेल और बाती के झंझट से बचने के लिए लोग मिट्टी के बने-बनाए वैक्स (मोम) और जेल वाले दीयों को काफी पसंद कर रहे हैं।
इसके अलावा बाजार में पानी से जलने वाले दीए और बिजली से जगमगाने वाली 21 दीयों की विशेष लड़ियां (स्ट्रिप्स) भी धूम मचा रही हैं। पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ने से मिट्टी (क्ले) से बनी गणेश-लक्ष्मी जी की मूर्तियों की भी भारी मांग है, जिन पर प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल हुआ है। मेरठ में बनी पॉलीरेसिन की मूर्तियां इस बार बेहद खास हैं।
शहर में करीब 200 से अधिक फैक्ट्रियां इस काम में लगी हैं, जो न केवल भारत बल्कि विदेशों (जैसे इंग्लैंड और इंडोनेशिया) तक भी इन बारीक नक्काशी वाली सुंदर मूर्तियों की सप्लाई करती हैं। सदर बाजार और अन्य शोरूम्स में भगवान गणेश, लक्ष्मी, राम दरबार और राधा-कृष्ण की सुनहरी और चमकदार पीतल की मूर्तियां अपनी फिनिशिंग के कारण लोगों की पसंद बनी हुई हैं।
दीपावली के पावन पर्व को देखते हुए मेरठ और आस-पास के इलाकों में माटीकला के कारीगरों और कुम्हारों के चाक ने पूरी रफ्तार पकड़ ली है। त्योहार को अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं, जिसके चलते प्रजापति समाज के परिवार दिन-रात मिट्टी के दीए, करवे और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां तैयार करने में व्यस्त हैं।इस बार बाजार में पारंपरिक दीयों के साथ-साथ फैंसी और डिजाइनर दीयों की भारी मांग देखी जा रही है। वहीं, बढ़ती डिमांड को देखते हुए स्थानीय कारीगरों का कहना है कि, वे इस साल विभिन्न प्रकार के आकर्षक दीए बना रहे हैं, जिनमें मैजिक दीए, स्टैंड वाले दीए और रंग-बिरंगे डिजाइनर दीए शामिल हैं।
मेरठ के थापर नगर, मलियाना, कंकरखेड़ा, शास्त्री नगर और दिल्ली रोड के आस-पास के क्षेत्रों में कुम्हारों के घरों के बाहर मिट्टी के बर्तनों और दीयों को सुखाने व पकाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। कारीगरों के अनुसार, चीनी और प्लास्टिक के सामान के मुकाबले इस बार लोग मिट्टी के दीयों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे उनके चेहरों पर खुशी है।
हालांकि, मिट्टी की बढ़ती कीमतों और ईंधन की लागत के कारण कारीगरों को कुछ दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि इस साल दिवाली पर उनका व्यापार अच्छा रहेगा। प्रशासन की ओर से भी माटीकला को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है। स्थानीय स्तर पर कारीगरों को अपनी कला प्रदर्शित करने और उत्पादों को बेचने के लिए फ्री स्टॉल और बाजार उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे सीधे ग्राहकों से जुड़ सकें।
बाजारों में रौनक अभी से बढ़ने लगी है और लोग 'लोकल फॉर वोकल' के नारे को अपनाते हुए मिट्टी के दीयों की एडवांस बुकिंग भी करा रहे है। कारीगरों का मानना है कि मिट्टी के दीए न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि यह देश की प्राचीन परंपरा और संस्कृति को भी जीवंत रखते हैं। दीपावली के इस उल्लास के बीच, मेरठ के ये मेहनती हाथ पूरे शहर को अपनी कला से रोशन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।