तीन दर्जन से अधिक कलाकारों के साथ हेमा मालिनी ने दी प्रस्तुति
नृत्य-संगीत के जरिए नदियों के संरक्षण और स्वच्छता का संदेश
चार युगों की यात्रा और श्रीकृष्ण लीलाओं का हुआ सजीव चित्रण
Brajraj Utsav 2026: भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में बृजरज उत्सव 2026 का आगाज शुक्रवार को वृंदावन स्थित नवनिर्मित स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ। मथुरा की सांसद और सिने अभिनेत्री हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका ‘गंगा’ ने दर्शकों को भारतीय पौराणिक परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जोड़ दिया। नृत्य, संगीत, शास्त्रीय भाव-भंगिमाओं और प्रभावशाली मंचीय तकनीक के माध्यम से मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से लेकर वर्तमान समय में नदियों की दुर्दशा तक की कहानी प्रस्तुत की गई। उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
सांसद हेमा मालिनी ने तीन दर्जन से अधिक कलाकारों के साथ मां गंगा की भूमिका में नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। करीब पौने दो घंटे की इस प्रस्तुति में धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति, शास्त्रीय नृत्य और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। मंच पर कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं और अभिनय के जरिए पौराणिक प्रसंगों को सजीव कर दिया। इस दौरान दर्शक आध्यात्मिक भाव से जुड़ते हुए नजर आए।
नृत्य नाटिका में मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की पौराणिक कथा को प्रमुखता से दर्शाया गया। राजा भगीरथ की तपस्या, अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए गंगा को धरती पर लाने का उनका संकल्प और भगवान शिव द्वारा गंगा की वेगवती धारा को अपनी जटाओं में धारण करने के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। शास्त्रीय नृत्य, संगीत और नाटकीय दृश्यों के माध्यम से मां गंगा की महिमा और मानव जीवन में उनके महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
प्रस्तुति में गंगा की यात्रा को चार युगों के परिप्रेक्ष्य में भी दिखाया गया। पौराणिक आख्यानों के साथ भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े प्रसंगों को मंच पर उतारा गया। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, कालिंदी के तट पर उनकी लीलाओं, महाभारत के युद्ध और श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश का भी सजीव चित्रण किया गया। इन प्रसंगों ने प्रस्तुति को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से व्यापक स्वरूप प्रदान किया।
नृत्य नाटिका का एक महत्वपूर्ण पक्ष नदियों की वर्तमान स्थिति और बढ़ते प्रदूषण की समस्या रहा। भारतीय संस्कृति में जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी मानी जाने वाली गंगा और यमुना की दुर्दशा को भावपूर्ण दृश्यों के माध्यम से सामने रखा गया। कलाकारों ने दिखाया कि मानवीय लापरवाही और प्रदूषण के कारण नदियों का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है। प्रस्तुति के जरिए यमुना सहित अन्य नदियों को साफ रखने और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण का संदेश दिया गया।
प्रस्तुति के बाद सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि वह पिछले कुछ वर्षों से गंगा पर आधारित नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर रही हैं। इसकी शुरुआत प्रयागराज से हुई और इसके बाद उन्होंने बनारस में भी प्रस्तुति दी। उनकी इच्छा थी कि वृंदावन में भी यह नाटिका प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि गंगा की कहानी यमुना की कहानी से भी जुड़ी हुई है। यमुना अत्यधिक प्रदूषित हो चुकी है और उसे स्वच्छ करना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से नाटिका में यमुना से जुड़े प्रसंगों को भी शामिल किया गया है।
हेमा मालिनी ने कहा कि बृजरज उत्सव के उद्घाटन दिवस पर स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में प्रस्तुति देना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि इससे पहले वह मुख्य रूप से राधा-कृष्ण और यशोदा-कृष्ण पर आधारित प्रस्तुतियां करती रही हैं, लेकिन गंगा पर आधारित नृत्य नाटिका प्रस्तुत करने का यह पहला अवसर था। उन्होंने ब्रज तीर्थ विकास परिषद का आभार जताते हुए कहा कि सांसद होने के साथ-साथ वह एक नृत्यांगना भी हैं। प्रेक्षागृह के निर्माण में उन्होंने अपने सुझावों के माध्यम से योगदान दिया था और अपने ही प्रेक्षागृह में प्रस्तुति देकर उन्हें विशेष आनंद मिला।
बृजरज उत्सव के तहत इस बार मथुरा के साथ वृंदावन के नवनिर्मित स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वृंदावन में भव्य शुरुआत के बाद अब मथुरा के धौलीप्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड पर उत्सव की अन्य गतिविधियां शुरू होंगी। यहां वंदनाश्री और ईशान मिश्रा की प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं।
हेमा मालिनी ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि उत्सव में गायक सुदेश भोसले अपनी गायकी और मिमिक्री से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका से लोकप्रिय हुए कलाकार सौरभ जैन ‘मेरे कृष्ण’ कार्यक्रम के माध्यम से प्रस्तुति देंगे।
बृजरज उत्सव की शुरुआत में ‘गंगा’ नृत्य नाटिका ने ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे से जोड़ते हुए दर्शकों के सामने एक प्रभावशाली संदेश रखा।