

पीस बॉन्ड भरने को लेकर AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने जताया विरोध
नेहा वोरा ने पीस बॉन्ड के मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है
प्रेसवार्ता करके कहा पीस बॉन्ड भरना संविधान के मौलिक अधिकार का हनन है।
Neha Will Not sign Any peace Bond; she State Legal Battle Will Continue: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के बाद पीस बॉन्ड भरने के नोटिस को लेकर JNU की छात्रा और छात्र संगठन AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने अपना विरोध जताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि वह कोई पीस बॉन्ड नहीं भरेंगी और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। नेहा वोरा ने प्रेसवार्ता करके बताया कि ये पीस बॉन्ड भरना मौलिक अधिकार का हनन है।
मिली जानकारी के मुताबिक, 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया। इसके बाद 17 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका (पीस बॉन्ड) भरने और जमानतदार उपलब्ध कराने का नोटिस दिया गया।
नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड से संबंधित नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, 23 अक्टूबर को अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने पुलिस को नोटिस के आधार में इस्तेमाल की गई सामग्री उपलब्ध कराने और संबंधित मजिस्ट्रेट को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने के निर्देश भी दिए।
प्रेसवार्ता कर नेहा बोरा ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना और सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना लोकतंत्र का अहम हिस्सा है। उनका तर्क है कि विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को पीस बॉन्ड जैसी प्रक्रिया के जरिए सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात भी कही है।
6 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंडी हाउस और चुनाव आयोग के विरोध मार्च में शामिल होने के दौरान उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 के तहत शांति बनाए रखने के लिए उन्हें ₹10,000 का पीस बॉन्ड भरने और एक जमानतदार पेश करने का नोटिस जारी किया था। नेहा को पीस बॉन्ड इसलिए दिया गया था क्योंकि दिल्ली पुलिस को आशंका थी कि उनकी गतिविधियों से शांति भंग हो सकती है।