आगरा विजिलेंस ने पंचायत सचिव मनीष भंडारी को रिश्वत लेते पकड़ा
ग्राम पंचायत में निर्माण कार्य का भुगतान जारी करने के बदले मांगा कमीशन
ठेकेदार के करीब ₹30 लाख के बकाया भुगतान के लिए मांगी थी पहली किस्त
Panchayat Secretary Arrest: उत्तर प्रदेश के मथुरा में विकास विभाग में कथित कमीशनखोरी का मामला सामने आया है। आगरा विजिलेंस की टीम ने शुक्रवार को राजीव भवन स्थित विकास विभाग के कार्यालय में छापा मारकर पंचायत सचिव मनीष भंडारी को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
आरोप है कि सचिव ने ग्राम पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों का भुगतान जारी कराने के बदले ठेकेदार से 30 प्रतिशत कमीशन मांगा था। विजिलेंस की इस कार्रवाई से विकास विभाग में हड़कंप मच गया।
पूरा मामला गोवर्धन विकासखंड की अड़ींग ग्राम पंचायत का है। यहां 39 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस ग्रांट के तहत ठेकेदार परवेज अहमद ने करीब दो करोड़ रुपये की लागत से इंटरलॉकिंग सड़क और नाली का निर्माण कराया था। इन कार्यों के बदले ठेकेदार का करीब 30 लाख रुपये का भुगतान होना था।
आरोप है कि पंचायत सचिव मनीष भंडारी ने भुगतान जारी कराने के लिए ठेकेदार से 30 प्रतिशत कमीशन मांगा। इससे परेशान होकर ठेकेदार ने आगरा विजिलेंस टीम से शिकायत कर दी। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने मामले की जांच की और रिश्वत लेते हुए सचिव को पकड़ने की योजना बनाई।
तय योजना के मुताबिक, ठेकेदार परवेज अहमद को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये लेकर पंचायत सचिव के पास पहुंचना था। शुक्रवार को ठेकेदार रकम लेकर मथुरा के राजीव भवन पहुंचा। इस दौरान आगरा विजिलेंस टीम के इंस्पेक्टर राकेश यादव भी उसके साथ मौजूद थे।
जैसे ही पंचायत सचिव मनीष भंडारी ने ठेकेदार से एक लाख रुपये लिए, पहले से मौजूद विजिलेंस टीम ने उसे पकड़ लिया। टीम ने मौके पर जरूरी कार्रवाई पूरी की और आरोपी सचिव को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।
सरकारी कार्यालय में रिश्वत लेते पंचायत सचिव की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। इस कार्रवाई ने ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के भुगतान की व्यवस्था और कथित कमीशनखोरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल यह है कि जब ग्राम पंचायतों में सड़क, नाली और दूसरे विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की सरकारी धनराशि दी जाती है, तो काम पूरा होने के बाद ठेकेदारों को भुगतान के लिए कथित कमीशन की मांग का सामना क्यों करना पड़ता है?
विजिलेंस टीम की कार्रवाई के बाद विकास विभाग के अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही भी चर्चा में है। हालांकि, इस मामले में किसी बड़े नेटवर्क की संलिप्तता को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कथित कमीशनखोरी का दायरा कितना बड़ा है और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं।
फिलहाल पंचायत सचिव की गिरफ्तारी के बाद विकास विभाग में हलचल है। अब सबकी निगाहें विजिलेंस की आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।