Uttar Pradesh Defence Corridor: उत्तर प्रदेश के रक्षा गलियारे में आयुध उपकरणों और हथियारों के उत्पादन का काम बड़े पैमाने पर शुरू हो गया है। रक्षा गलियारे के कानपुर नोड में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस 250 एकड़ जमीन पर करीब 2000 करोड़ रूपये के निवेश के साथ विस्तार की तैयारी की जा रही है। वहीं चित्रकूट में भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) की ओर से 600 करोड़ रूपये का निवेश किया जा रहा है।
जहां कानपुर नोड में स्थापित अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस का 30 करोड़ राउंड गोलियों व लाखों ग्रेनेड उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। वहीं बीईएल राडार व एयर डिफेंस सिस्टम का निर्माण करेगी। प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने बताया कि रक्षा उत्पादन के नए केंद्र में रडार और एयर डिफेंस सिस्टम बनेंगे। गोयल की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय अधिकार प्राप्त समिति ने बीईएल को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
परियोजना में 600 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा। बेल की प्रस्तावित इकाई में रडार और एयर डिफेंस सिस्टम का विनिर्माण किया जाएगा। परियोजना में शुरुआती निवेश करीब 562.5 करोड़ प्रस्तावित है। भविष्य की रक्षा परियोजनाओं को शामिल करते हुए कंपनी ने कुल 600 करोड़ से अधिक के निवेश की योजना प्रस्तुत की है। चित्रकूट में रक्षा औद्योगिक गलियारे के नोड के तहत बीईएल को 75 हेक्टेयर जमीन पहले ही आवंटित की जा चुकी है। परियोजना से 300 से अधिक प्रत्यक्ष उच्च कुशल रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
रक्षा गलियारे के कानपुर नोड में स्थापित अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने बताया कि कानपुर के हाथीपुर क्षेत्र में करीब 250 एकड़ में यूनिट का विस्तार भी प्रस्तावित है। उनके मुताबिक इस प्रस्तावित सुविधा में करीब 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कंपनी पहले ही कानपुर में करीब 4,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है। इसके अलावा अगले कुछ वर्षों में करीब 4,000 करोड़ रुपये और निवेश करने की योजना बना रही है। इससे उत्तर प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
उन्होंने बताया कि अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के इस सेंटर में फिलहाल करीब 2,000 कुशल और अकुशल कर्मचारी काम कर रहे हैं। प्रस्तावित विस्तार के बाद रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। कानपुर स्थित इस डिफेंस एम्युनेशन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में हर साल करीब 15 करोड़ राउंड विभिन्न स्तर की गोलियों का उत्पादन किया जा रहा है।
इस निर्माण क्षमता को साल के अंत तक बढ़ाकर करीब 30 करोड़ करने का प्रयास है। कंपनी ने ग्रेनेड उत्पादन क्षमता बढ़ाने की भी योजना बताई है। इसके तहत 2027 तक सालाना 40 लाख यूनिट ग्रेनेड उत्पादन की क्षमता हासिल करने की उम्मीद है। वहीं 2029 तक 40 लाख यूनिट की अतिरिक्त क्षमता बढ़ाई जाएगी।