योगी कैबिनेट  (सोर्स- नवभारत लाइव)
लखनऊ

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: यूपी के 75 जिलों को 9 जोन में बांटकर युवाओं को मिलेगा रोजगार प्रशिक्षण

Yogi Cabinet Decisions: योगी कैबिनेट ने उप्र में 1725 करोड़ रुपये की कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार योजना को मंजूरी दी। पहले चरण में लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, गौतमबुद्ध नगर और झांसी में केंद्र स्थापित होंगे।

राजेश कुमार मिश्र, स्निग्धा श्रीवास्तव

UP Skill Training Scheme 2026: उत्तर प्रदेश को ग्लोबल मैनपावर हब के तौर पर विकसित किए जाने के उद्देश्य से कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों को जोड़ते हुए नौ जोन में कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। इस पूरी परियोजना को निजी क्षेत्र की मदद से संचालित किया जाएगा जिस पर 1725 करोड़ रूपये का निवेश होगा। पहले चरण में लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, गौतमबुद्ध नगर और झांसी में कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र (एसवीपीएसटीपीजेड) विकास योजना को मंजूरी दी गई। इस योजना के जरिए उत्तर प्रदेश को ‘अल्टीमेट सोर्सिंग हब ऑफ स्किल्ड मैनपावर’ और ‘ग्लोबल मैनपावर हब’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जिलों को करते हुए नौ जोन में कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। इससे युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर देश-विदेश में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ने में सहायता मिलेगी।

प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई उद्यम

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई उद्यम हैं, जो देश के कुल लगभग 6.77 करोड़ उद्यमों का 14.2 फीसदी हैं। प्रदेश के औद्योगिक उत्पादन में इस क्षेत्र का योगदान लगभग 60 फीसदी जबकि निर्यात में लगभग 45 फीसदी है। इस क्षेत्र में तीन करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं। उद्योगों की बढ़ती मांग के अनुरूप कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और युवाओं को व्यापक स्तर पर रोजगार से जोड़ने में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रदेश के सभी जनपदों को नौ जोन में विभाजित कर हब एवं स्पोक मॉडल पर कौशल विकास एवं रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। प्रत्येक जोन में स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों, बाजार की मांग और रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

पहले चरण में पांच प्रमुख स्थानों का चुनाव

योजना के पहले चरण में पांच प्रमुख स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें एमएसएमई विभाग द्वारा लखनऊ में, सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर कानपुर में, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) द्वारा गोरखपुर में, नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के संयुक्त सहयोग से गौतमबुद्ध नगर में तथा बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) द्वारा झांसी में एक-एक केंद्र स्थापित किया जाएगा।

योजना के तहत जोन एक में गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद एवं हापुड़, जोन-2 में सहारनपुर मंडल तथा बुलंदशहर, बागपत एवं मेरठ, जोन-3 में मुरादाबाद एवं बरेली मंडल, जोन-4 में आगरा एवं अलीगढ़ मंडल, जोन-5 में लखनऊ एवं अयोध्या मंडल, जोन-6 में कानपुर एवं प्रयागराज मंडल, जोन-7 में चित्रकूट, विंध्याचल एवं झांसी मंडल, जोन-8 में वाराणसी एवं आजमगढ़ मंडल जबकि जोन-9 में गोरखपुर, बस्ती एवं देवीपाटन मंडल शामिल हैं।

युवाओं को दिया जाएगा आधारभूत कौशल प्रशिक्षण

इन जोनों में बनने वाले केंद्र 10 से 25 एकड़ में विकसित होंगे। केंद्रों का विकास एवं संचालन सार्वजनिक-निजी सहभागिता आधारित डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन एवं हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल अथवा शासकीय संस्थाओं के माध्यम से किया जाएगा। योजना के अंतर्गत मानविकी एवं वाणिज्य जैसे गैर-तकनीकी विषयों की पृष्ठभूमि वाले युवाओं को आधारभूत कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए तकनीकी कौशल उन्नयन की व्यवस्था होगी। देश के अन्य राज्यों तथा विदेशों में उपलब्ध रोजगार अवसरों के अनुरूप आवश्यकता आधारित भारतीय एवं विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षणार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा तथा परिसर में ही सेवायोजन कार्यालय एवं प्लेसमेंट सेल की व्यवस्था की जाएगी। देश और विदेश में नियोजन के क्षेत्र में कार्यरत मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

परियोजना के तहत आगामी तीन वर्षों में कुल 1,725 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। निजी विकासकर्ताओं एवं प्रशिक्षण प्रदाताओं को आवश्यकता के अनुसार वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। कौशल प्रशिक्षण एवं सेवायोजन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकी सुविधाओं के उपयोग की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी भागीदार के चयन का प्रावधान किया गया है।

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