चचा के नाम पर सपा की जीत का जश्न
पोस्टरों में शिवपाल का जलवा
अखिलेश की तस्वीर नदारद
Samajwadi Party Poster: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछने से पहले पोस्टरों के जरिए राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस शुरू हो गई है। एमएलसी चुनाव में मिली सफलता के बाद लखनऊ में लगाए गए पोस्टर जीत के जश्न से आगे बढ़कर राजनीतिक संदेश देते नजर आ रहे हैं। इन पोस्टरों में शिवपाल सिंह यादव को प्रमुखता दी गई है, लेकिन अखिलेश यादव की तस्वीर पूरी तरह नदारद है।
पोस्टरों पर लिखे नारे भी राजनीतिक संदेश देने वाले हैं। कहीं 'चचा हैं तो सपा है' लिखा है तो कहीं 'शिवपाल के जादू से बीजेपी का किला हुआ ध्वस्त' का दावा किया गया है। इन नारों के जरिए शिवपाल यादव की भूमिका को पार्टी की चुनावी सफलता से जोड़ने की कोशिश की गई है। पोस्टर फर्रुखाबाद के सपा नेता राममूर्ति यादव की ओर से लगवाए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस पोस्टर पॉलिटिक्स ने राजनीतिक गलियारों में एक अलग तरह की चर्चा को जन्म दिया है। सवाल यह है कि जब पार्टी की जीत सामूहिक प्रयासों का नतीजा है, तो पोस्टरों में केवल शिवपाल यादव को ही केंद्र में क्यों रखा गया? क्या समर्थक अपने नेता की संगठनात्मक और चुनावी भूमिका को सामने लाना चाहते हैं या फिर इसके जरिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक कोई सियासी संदेश पहुंचाने की कोशिश हो रही है?
दरअसल, एमएलसी चुनाव में सपा की सफलता के बाद पार्टी कार्यकर्ता जहां जीत का जश्न मना रहे हैं, वहीं पोस्टरों के जरिए सामने आया यह संदेश कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या शिवपाल समर्थक अपने नेता की राजनीतिक भूमिका को अधिक प्रभावशाली बताना चाहते हैं? क्या यह केवल समर्थकों का उत्साह है या फिर विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर शिवपाल की अहमियत दिखाने की कोशिश?
सबसे अधिक चर्चा अखिलेश यादव की तस्वीर गायब होने को लेकर है। ऐसे समय में जब सपा नेतृत्व लगातार एकजुटता का संदेश दे रहा है, तब पोस्टरों की यह तस्वीर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग मायने निकाले जाने की वजह बन गई है।