Kaushambi Firecracker Factory Blast: महज 10 फीट की दुकान से पटाखों का कारोबार शुरू करने वाला नौशाद देखते ही देखते बारूद के बड़े कारोबारी के रूप में स्थापित हो गया। कारोबार बढ़ने के साथ उसने अलग-अलग स्थानों पर गोदाम भी बना लिए। लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी बारूद और पटाखों का धंधा बंद नहीं किया। चिल्ला शहबाजी में उसकी अवैध पटाखा फैक्ट्री में सोमवार को हुए भीषण विस्फोट में 14 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने जब कारोबार की परतें खंगालनी शुरू कीं तो कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं।
महम्मदपुर मनौरी बाजार में पिता निजामुद्दीन की महज 10 फीट की दुकान से नौशाद ने पटाखों का कारोबार शुरू किया था। करीब एक दशक में उसने कारोबार का लगातार विस्तार किया। धीरे-धीरे वह पटाखा कारोबारी से फैक्ट्री संचालक बन गया। कारोबार बढ़ने के साथ अलग-अलग जगहों पर कच्चे माल और तैयार पटाखों के भंडारण के लिए गोदाम तैयार कर लिए। प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद उसने कारोबार जारी रखा।
नौशाद के घर में दो साल पहले यानी वर्ष 2024 में भी विस्फोट हुआ था। दीपावली से ठीक पहले घर में छिपाकर रखे गए पटाखों में अचानक धमाका हो गया था। हालांकि उस घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन पड़ोस के घर की दीवारें जरूर गिर गई थीं। इसके बावजूद बारूद के कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी।
नौशाद की दुकान के सामने ही पिपरी थाना पुलिस की पिकेट लगती थी। जानकारी के मुताबिक, ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के खानपान की व्यवस्था नौशाद ही करता था। दरोगा और थानेदार के बाहर जाने पर चारपहिया वाहन व रास्ते का खर्च भी वह उठाता था। इसी कारण 2024 के बाद लाइसेंस निरस्त होने की जानकारी के बावजूद पुलिस की ओर से उसके कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
विस्फोट के बाद प्रशासन ने नौशाद के कारोबार की पड़ताल शुरू की। जांच में मनौरी, चिल्ला शहबाजी और धन्नी गांव स्थित गोदामों से बड़ी मात्रा में बारूद और पटाखे बरामद किए गए। अब तक सामने आए गोदामों की संख्या आठ बताई जा रही है। बरामद बारूद की मात्रा इतनी अधिक थी कि जांच में जुटे अधिकारी भी हैरान रह गए।
विस्फोट के बाद नौशाद और उसके परिजनों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। मंगलवार को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किए गए नौशाद ने पूछताछ में करीब 20 क्विंटल बारूद का भंडारण पटाखे बनाने के लिए करने की बात कबूल की। घटना ने अवैध पटाखा कारोबार, बारूद के भंडारण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।