चकबंदी में गड़बड़ी का खुलासा: प्रयागराज में 37 बीघा वन भूमि का फर्जी नामांतरण निरस्त; फिर हुई वन विभाग के नाम

Prayagraj Forest Land: प्रयागराज के बारा तहसील क्षेत्र में 37 बीघा वन भूमि फर्जी नामांतरण का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन दोबारा अपने नाम दर्ज की।
Administration Restores 37 Bighas of Forest Land After Fake Mutation in Prayagraj
प्रयागराज वन भूमि (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Prayagraj Forest Government Land Scam: प्रयागराज के बारा तहसील क्षेत्र में वन विभाग की करीब 37 बीघा बंजर वन भूमि के फर्जी नामांतरण का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जमीन को दोबारा वन विभाग के खाते में दर्ज कर दिया है। यह जमीन करोड़ों रुपये मूल्य की बताई जा रही है, जिसे वर्षों पहले चकबंदी के दौरान कथित अनियमितता कर प्रयागराज, जौनपुर और हरियाणा के छह लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया था।

37 बीघा जमीन का नामांतरण चकबंदी प्रक्रिया फर्जी

जानकारी के अनुसार, बारा तहसील के कोटा गांव स्थित लगभग 500 बीघा वन भूमि में से 37 बीघा जमीन का नामांतरण चकबंदी प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से फर्जी तरीके से कर दिया गया था। यह मामला लंबे समय तक दबा रहा, लेकिन पिछले वर्ष कुछ लोगों द्वारा संबंधित भूमि पर निर्माण का प्रयास किए जाने के बाद इसकी परतें खुलनी शुरू हुईं। इसके बाद तहसील प्रशासन ने जांच शुरू कराई।

वन विभाग को वापस मिली अपनी जमीन

जांच में सामने आया कि कई दशक पहले चकबंदी के दौरान तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही और वन भूमि को छह लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया था। बाद में चकबंदी विभाग की जांच रिपोर्ट में भी इस नामांतरण को फर्जी करार दिया गया। रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए संबंधित भूमि को फिर से वन विभाग के खाते में दर्ज करा दिया।

राजस्व अभिलेखों में संशोधन

मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पहले स्तर पर कार्रवाई की गति धीमी रही, लेकिन तथ्यों की पुष्टि होने के बाद राजस्व अभिलेखों में संशोधन किया गया।

जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि संबंधित भूमि को वन विभाग के नाम पुनः दर्ज कर दिया गया है। साथ ही जिले में वन विभाग की अन्य जमीनों पर यदि कहीं अवैध कब्जा है या भूमि विवाद लंबित हैं, तो उनकी भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी संपत्तियों पर हुए अवैध कब्जों पर लगेगा अंकुश

यह मामला न केवल चकबंदी प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं को उजागर करता है, बल्कि सरकारी भूमि की सुरक्षा और राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन अब ऐसे अन्य मामलों की भी समीक्षा की तैयारी में है, ताकि सरकारी संपत्तियों पर हुए अवैध कब्जों और फर्जी नामांतरण की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

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