कभी गंदगी, बदबू और अतिक्रमण की पहचान रहा गोड़धोइया नाला
अब शहरी सुंदरीकरण परियोजना के रूप में विकसित
1 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे लोकार्पण
रामगढ़ताल तक नहीं पहुंचेगा सीधे गंदा पानी
Goddhoiya Drain Project: गोरखपुर शहर के उत्तरी हिस्से में रहने वाले लाखों लोगों के लिए गोड़धोइया नाले का नाम कभी राहत नहीं, बल्कि जलभराव, गंदगी और बदबू की परेशानी से जुड़ा रहा है। बारिश के दिनों में नाले के आसपास के इलाकों में जलभराव की समस्या लोगों की मुश्किलें बढ़ाती रही है। वर्षों तक उपेक्षा और अवैध अतिक्रमण का दंश झेलने वाले इस नाले को अब नए सिरे से व्यवस्थित करने की कवायद की जा रही है। करीब 495.24 करोड़ रुपये की लागत से तैयार परियोजना का पहला चरण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1 नवंबर 2026 को इसका लोकार्पण करेंगे।
गोड़धोइया नाला गोरखपुर शहर के उत्तरी हिस्से में जल निकासी का प्रमुख माध्यम रहा है। इसके पुनर्जीवित होने से बाबा राघव दास नगर, शाहपुर, पादरी बाजार, बिछिया, बसारतपुर और रामजानकी नगर समेत आसपास के इलाकों में रहने वाले करीब 3.5 लाख लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य बारिश के दौरान होने वाले भारी जलभराव से लोगों को निजात दिलाना है। हालांकि, करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद इसकी वास्तविक सफलता आने वाले बारिश के मौसम में ही दिखाई देगी।
इस परियोजना का महत्व केवल जल निकासी तक सीमित नहीं है। गोड़धोइया नाले का गंदा, बदबूदार और जहरीला पानी पहले गोरखपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल रामगढ़ताल में पहुंचता था। इसके कारण तालाब के पानी की गुणवत्ता और उसमें रहने वाले जलीय जीवों पर भी असर पड़ने की बात सामने आती रही है। मछलियों और अन्य जलीय जीवों के मरने की घटनाएं भी चिंता का विषय रही हैं।
अब परियोजना के तहत गंदे पानी को फिल्टर करने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि शोधित पानी ही रामगढ़ताल तक पहुंचे। इससे तालाब की स्वच्छता और खूबसूरती बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल पहले चरण का काम पूरा होना शहर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन असली परीक्षा इसके संचालन और रखरखाव की होगी। सवाल यही है कि क्या 495 करोड़ रुपये की यह परियोजना वास्तव में लोगों को जलभराव, गंदगी और बदबू से स्थायी राहत दिला पाएगी? लोकार्पण के बाद इसका जवाब जमीन पर दिखाई देने वाली व्यवस्था देगी।