Ballia Rajat Mishra Missing Case: एक हजार पन्नों की फाइल, हाथ में बेटे की तस्वीर और आंखों में डेढ़ साल पुरानी उम्मीद...। बलिया के मनियर थाना क्षेत्र के कोटवा गांव निवासी अखिलेश मिश्रा के लिए हर दिन इसी इंतजार में बीता कि शायद उनका बेटा रजत लौट आए। 12 साल का रजत 13 मई 2025 को घर से लापता हुआ था। परिवार ने उसे तलाशने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन डेढ़ साल बाद भी बेटे का शव तक परिवार को नहीं मिल सका। आखिरकार पितृपक्ष में पिता ने बेटे का पुतला बनाकर उसका अंतिम संस्कार किया।
अखिलेश मिश्रा का कहना है कि बेटे के लापता होने के बाद उन्होंने गांव से लेकर रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की। जब कोई सुराग नहीं मिला तो मनियर थाने में शिकायत दी गई। परिवार के मुताबिक, पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
परिवार के मुताबिक, रजत के साथ अक्सर खेलने वाला गांव का ही यशराज तिवारी उसे 13 मई की शाम अपने साथ लेकर गया था। परिवार का कहना है कि रजत के देर शाम तक घर नहीं लौटने पर उसकी तलाश शुरू की गई।
इसके दो दिन बाद भोजपुरवा गांव के समीप घाघरा नदी किनारे एक अज्ञात शव मिलने की सूचना परिवार को मिली। अखिलेश मिश्रा और उनके परिजन मौके पर पहुंचे। परिवार का दावा है कि शव के कपड़े और लॉकेट को देखकर उन्होंने उसे रजत के रूप में पहचाना। हालांकि, पुलिस ने शव को रजत का मानने से इनकार कर दिया।
परिजनों के मुताबिक, शव का चेहरा क्षतिग्रस्त था। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस की ओर से परिवार को बताया गया कि शव की उम्र करीब 20 वर्ष और वजन करीब 65 किलो है, इसलिए यह रजत का शव नहीं हो सकता।
परिवार के मन में संदेह बना रहा। माता-पिता ने शव की पहचान के लिए डीएनए जांच की मांग की। परिवार का दावा है कि इसके लिए नमूने भेजे गए और करीब छह महीने बाद डीएनए रिपोर्ट आई। परिजनों के अनुसार, रिपोर्ट में मिले शव के नमूने का रजत के परिवार के नमूने से मिलान हुआ।
अखिलेश मिश्रा का आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें बेटे की मौत के मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली। उनका कहना है कि वह थाने से लेकर पुलिस अधिकारियों और अदालत तक लगातार न्याय की गुहार लगाते रहे।
डेढ़ साल का लंबा इंतजार परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक रहा। मां सुनीता मिश्रा आज भी बेटे को याद कर भावुक हो जाती हैं। परिवार का कहना है कि जब वास्तविक शव उनके पास नहीं था और बेटे की मौत की पुष्टि होने का दावा किया जा रहा था, तो पितृपक्ष में उन्होंने रजत का पुतला तैयार कराया और उसका अंतिम संस्कार किया।
पिता अखिलेश मिश्रा कहते हैं कि बेटे का अंतिम संस्कार अपने हाथों से करने की इच्छा थी, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें बेटे के पुतले का अंतिम संस्कार करने को मजबूर कर दिया।
रजत की मां सुनीता मिश्रा का आरोप है कि घटना वाले दिन यशराज तिवारी उनके बेटे को अपने साथ लेकर गया था। परिवार के मुताबिक, पूछताछ के दौरान यशराज ने बताया था कि रजत उसके साथ नदी किनारे तक गया था और इसके बाद वह उसे वहीं छोड़कर वापस आ गया।
परिवार का आरोप है कि इसी घटना के बाद रजत की मौत हुई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
परिजनों के मुताबिक, मामले में यशराज तिवारी की गिरफ्तारी हुई थी। परिवार अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच और कार्रवाई की मांग कर रहा है। पिता का आरोप है कि उन्हें लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
अखिलेश मिश्रा का यह भी आरोप है कि उन्हें और परिवार को धमकियां मिलती रही हैं। उनका कहना है कि वह अपनी सुरक्षा और बेटे के मामले में न्याय के लिए लगातार अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं।
परिवार ने पुलिस पर मामले में लापरवाही और जांच में लीपापोती के आरोप लगाए हैं। अखिलेश मिश्रा का आरोप है कि जांच के दौरान उनके साथ सहयोग नहीं किया गया और कई बार उन्हें अधिकारियों के कार्यालयों से निराश लौटना पड़ा। परिवार ने कुछ साक्ष्यों को लेकर भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया। हालांकि, पुलिस की ओर से कैमरे पर इस प्रकरण के संबंध में बयान देने से इनकार कर दिया गया।
अब रजत के माता-पिता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके बेटे की मौत की परिस्थितियां क्या थीं और इस मामले में पूरी सच्चाई सामने कब आएगी। डेढ़ साल तक बेटे की राह देखने के बाद परिवार ने पितृपक्ष में पुतले का अंतिम संस्कार तो कर दिया, लेकिन न्याय की उम्मीद अब भी बाकी है।
एक तस्वीर, एक हजार पन्नों की फाइल और बेटे की यादें- इन्हीं के सहारे अखिलेश और सुनीता आज भी उस जवाब की तलाश में हैं, जिसका इंतजार उन्हें रजत के लापता होने के दिन से है।