दिहौली में स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
अलीगढ़ में बच्चों की जान से खिलवाड़
क्या हादसे के इंतजार में है प्रशासन
स्कूल जाने वाले मासूमों की सुरक्षा खतरे में
Aligarh School Transport Safety: केंद्र और प्रदेश सरकारें बच्चों को शिक्षित करने के लिए तमाम योजनाएं चला रही हैं। उत्तर प्रदेश में ‘स्कूल चलो अभियान’ के जरिए बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की मुहिम चलाई जा रही है। वहीं, निजी विद्यालय भी बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के दावे करते हैं। लेकिन इन तमाम प्रयासों के बीच कुछ ऐसे मामले सामने आते हैं, जो शिक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर देते हैं। अलीगढ़ के विजयगढ़ थाना क्षेत्र के दिहौली से सामने आया एक ऐसा ही मामला इन दिनों चर्चा में है। यहां छोटे-छोटे मासूम बच्चों को कथित तौर पर एक अवैध वाहन में क्षमता से अधिक भरकर विद्यालय ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बच्चों को जिस तरह वाहन में ठूंसकर ले जाते हुए दिखाया जा रहा है, उसने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्कूल जाने की उम्र में बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा मिलनी चाहिए, लेकिन वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति इसके ठीक उलट नजर आती है। यदि वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है और जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, तो यह बच्चों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
दावा किया जा रहा है कि पिछले करीब दो वर्षों से मासूम बच्चे इसी तरह असुरक्षित परिस्थितियों में विद्यालय जाने को मजबूर हैं। सवाल यह भी है कि जिस तरीके से बच्चों को जानवरों की तरह ठूस कर ले जाया जा रहा है और इस बीच में कोई दुर्घटना हो जाए तो जिम्मेदार कौन होगा... सवाल यह है कि यदि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, तो अब तक संबंधित विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी?
बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का उद्देश्य किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि हादसे की आशंका को पहले ही खत्म करना है। इसके बावजूद यदि किसी विद्यालय के नाम पर चलने वाले वाहन में बच्चों की सुरक्षा की अनदेखी हो रही है, तो संबंधित विद्यालय प्रबंधन के साथ-साथ निगरानी करने वाले विभागों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
मामले ने शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या क्षेत्र में संचालित स्कूली वाहनों की नियमित जांच की जा रही है? क्या संबंधित वाहन के दस्तावेज, फिटनेस, परमिट और सुरक्षा मानकों की पड़ताल हुई है? यदि वाहन नियमों के विपरीत संचालित हो रहा है, तो उसके खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
सरकार बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने और शिक्षा से जोड़ने के लिए अभियान चलाती है, लेकिन शिक्षा तक पहुंचने का रास्ता ही असुरक्षित हो तो इन प्रयासों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मासूम बच्चों की सुरक्षा केवल अभिभावकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विद्यालय प्रबंधन और संबंधित सरकारी विभागों की भी जवाबदेही बनती है।
अलीगढ़ के विजयगढ़ क्षेत्र के दिहौली से वायरल हुए वीडियो के बाद अब जरूरत इस बात की है कि परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग मामले का संज्ञान लेकर वाहन की पहचान करें, उसकी वैधता की जांच कराएं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्योंकि बच्चों की जिंदगी किसी भी लापरवाही से कहीं अधिक कीमती है। प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि स्कूल जाने वाले मासूम सुरक्षित अपने घर लौट सकें।