इटावा के स्कूल में बेंच-डेस्क नहीं, 79 बच्चें चटाई पर बैठकर पढ़ने को मजबूर; शिक्षा विभाग पर उठे सवाल

Etawah School News: इटावा में परिषदीय स्कूलों के बच्चे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जमीन पर चटाई बिछाकर बैठने को मजबूर हैं। उनके बैठने के लिए बेंच-डेस्क की व्यवस्था नहीं है।
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जमीन पर चटाई बिछाकर पढ़ते बच्चों की फोटो।सोर्स- फोटो भारत
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Highlights

  • इटावा के प्राथमिक विद्यालय तृतीय में 79 छात्र-छात्राएं चटाई पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर

  • बच्चों के बैठने के लिए बेंच-डेस्क की व्यवस्था नहीं, जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे नौनिहाल

  • प्रधानाचार्य ने फर्नीचर के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजे, लेकिन अब तक नहीं हुई व्यवस्था

  • सर्दी नजदीक आने से बढ़ सकती है बच्चों की परेशानी, बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठे सवाल

Etawah News: इटावा के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच जसवंतनगर के प्राथमिक विद्यालय तृतीय में छात्र-छात्राएं चटाई पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय में 79 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, लेकिन उनके बैठने के लिए बेंच-डेस्क की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में नौनिहालों को जमीन पर बैठकर ही शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है।

सर्दी का मौसम नजदीक आने के साथ ही बच्चों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। ठंडी जमीन पर बैठकर पढ़ाई करना छोटे बच्चों के लिए असुविधाजनक हो सकता है। इसके बावजूद विद्यालय में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं होने से बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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प्रधानाचार्य रिजवाना बोलीं- अधिकारियों को पत्र भेजे जा चुके हैं

विद्यालय की प्रधानाचार्य रिजवाना परवीन के मुताबिक, बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर उपलब्ध कराने के संबंध में संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक विद्यालय में बेंच-डेस्क की व्यवस्था नहीं हो सकी है। विद्यालय में 79 बच्चों का पंजीकरण होने के बावजूद बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं होना शिक्षा विभाग की बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। 

अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी बच्चों की समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और सर्दी शुरू होने से पहले विद्यालय में फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं। सवाल यह है कि जब बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की बात की जाती है, तो उनके बैठने जैसी बुनियादी सुविधा के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा? 

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