Highlights
UGC रोलबैक की मांग पर फिर गरमाया
आंदोलन एत्मादपुर के गढ़ी बच्ची में आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कल से अनशन पर 11 और युवा बैठेंगे
मांगें नहीं मानीं तो 10 हजार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ दिल्ली कूच का ऐलान
UGC Rollback Movement: यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब व्यापक रूप लेता दिखाई दे रहा है। आगरा सहित प्रदेश के कई हिस्सों में सवर्ण समाज के युवाओं का विरोध लगातार सामने आ रहा है। आगरा में पहले भी इस मुद्दे पर बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें युवा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ सड़कों पर उतरे थे। इस दौरान पुलिस-प्रशासन के साथ झड़प और हल्के बल प्रयोग की घटनाएं भी सामने आई थीं। इसके बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आंदोलन से जुड़े युवा यूजीसी के प्रावधानों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं और सरकार को आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं।
इसी कड़ी में एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र के गढ़ी बच्ची में रोहित तोमर पिछले छह दिनों से अनशन पर बैठे हैं। उनकी मांगों को लेकर अब आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। अनशन स्थल पर जुट रहे युवाओं ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को दिल्ली तक ले जाया जा सकता है।
रोहित तोमर तीन प्रमुख मांगों को लेकर अनशन कर रहे हैं। इनमें यूजीसी से जुड़े प्रावधानों की वापसी, एससी-एसटी से संबंधित मुद्दे और आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग शामिल है। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार को इन मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और उनकी मांगों पर बातचीत करनी चाहिए।
अनशन में रोहित तोमर का साथ दे रहे युवा एमएस ठाकुर ने कहा कि फिलहाल रोहित अकेले अनशन पर बैठे हैं, लेकिन बुधवार से 11 और युवा अनशन में शामिल होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने समय रहते पहल नहीं की तो आंदोलनकारी 5,000 नहीं, बल्कि 10,000 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ नई दिल्ली कूच करने के लिए मजबूर होंगे।
एमएस ठाकुर के इस बयान से साफ है कि आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
अनशन स्थल पर पहुंचे किसान नेता मनोज शर्मा ने यूजीसी के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी से जुड़े प्रावधानों को लागू करने की दिशा में बढ़कर भाजपा अपने ही कोर वोटर को दूर करने का काम कर रही है। उनका कहना था कि सरकार को किसी भी कानून के प्रभाव और उससे समाज में पैदा होने वाली आशंकाओं को गंभीरता से समझना चाहिए।
मनोज शर्मा ने कहा कि लोगों को यूजीसी से जुड़े प्रावधानों को पहले पढ़ना चाहिए और उसके बाद इस पर अपनी राय बनानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण समाज के विभिन्न वर्गों के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। उनके मुताबिक, अंग्रेजों के शासनकाल में भी ऐसी स्थिति पैदा नहीं हुई थी, जैसी उन्हें मौजूदा हालात में दिखाई दे रही है।
उन्होंने भाजपा के जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। मनोज शर्मा ने कहा कि आगरा में भाजपा के नौ विधायक और चार सांसद होने के साथ महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में सभासद भी हैं। इसके बावजूद, अब तक किसी जनप्रतिनिधि ने अनशन स्थल पर पहुंचकर रोहित तोमर से मुलाकात करने की पहल नहीं की है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा के जनप्रतिनिधि अनशनकारी से मिलने क्यों नहीं पहुंचे? मनोज शर्मा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को आंदोलनकारियों को केवल वोटर के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि उनकी बातों को देश के नागरिकों की आवाज के रूप में सुनना चाहिए।
किसान नेता मनोज शर्मा ने यूजीसी रोलबैक के मुद्दे को लेकर एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि यूजीसी से जुड़ा यह पूरा घटनाक्रम अयोध्या में कथित चंदा चोरी के मामले से ध्यान हटाने के लिए खड़ा किया गया है। उन्होंने भाजपा पर हिंदू समाज को बांटने और देश को विभाजित करने का आरोप भी लगाया।
छह दिनों से अनशन पर बैठे रोहित तोमर ने 'नव भारत' से बातचीत में कहा कि अब तक किसी अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली है। उन्होंने बताया कि मंगलवार, 13 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे तक अधिकारियों की ओर से समय लिया गया था, लेकिन उनके अनुसार निर्धारित समय तक कोई अधिकारी अनशन स्थल पर नहीं पहुंचा।
रोहित तोमर का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर बातचीत नहीं होती और समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं की जाती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगों पर सुनवाई होने तक वह पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
फिलहाल गढ़ी बच्ची में जारी अनशन के बीच आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी दी गई है। बुधवार से 11 अन्य युवाओं के अनशन में शामिल होने के ऐलान के बाद प्रशासन के सामने स्थिति को संवाद के जरिए संभालने की चुनौती है। अब इस आंदोलन में युवा ही नहीं रोहित का साथ देने के लिए बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति बता रही थी वह अपने बच्चों के साथ खड़ी हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन आंदोलनकारियों से बातचीत की पहल करता है या यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर यह विरोध आने वाले दिनों में और तेज होता है।