पालतू कुत्ते जय और गुड़िया की शाही शादी; घोड़े और पालकी के साथ धूमधाम से निकली बारात, अब बनवा रहे पक्के मकान

Gorakhpur Dog Wedding: जंगल कौड़िया क्षेत्र के जसवल बाजार गांव में विवेक भूषण साहनी ने अपने पालतू कुत्ते जय और कुतिया गुड़िया की शाही अंदाज में शादी कराई। ग्रामीणों के भोज के बीच आयोजन चर्चा में है।
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कुत्ते जय और कुतिया गुड़िया (सोर्स- नवभारत लाइव)
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Highlights

  • इंसान ही नहीं, बेजुबानों के लिए भी खास है प्यार

  • विवेक भूषण साहनी ने पालतू कुत्ते-कुतिया की रचाई शादी

  • घोड़े, पालकी और ग्रामीणों के लिए भोज का आयोजन

  • अब पशु कल्याण को लेकर भी उठ रहे सवाल

Pet Dogs Marriage Gorakhpur: गोरखपुर जनपद के जंगल कौड़िया क्षेत्र स्थित जसवल बाजार गांव में एक अनोखी शादी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। इसी गाव के रहने वाले विवेक भूषण साहनी ने अपने पालतू कुत्ते ‘जय’ और कुतिया ‘गुड़िया’ की शादी पूरे शाही अंदाज में कराई। इस अनूठे आयोजन में पारंपरिक विवाह समारोह जैसी झलक देखने को मिली। धूमधाम से बारात निकली, घोड़े और पालकी सजाए गए तथा ग्रामीणों के लिए भोज का आयोजन किया गया। बेजुबान जानवरों के प्रति प्रेम और अपनत्व की इस अनोखी मिसाल ने पूरे आयोजन को खास बना दिया।

शाही ठाठ-बाट से निकली बारात, ग्रामीणों के लिए हुआ भोज

विवेक भूषण साहनी ने अपने पालतू जय और गुड़िया की शादी को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। विवाह समारोह को पारंपरिक रस्मों और उत्सवी माहौल के साथ आयोजित किया गया। सजी-धजी बारात जब निकली तो ग्रामीणों के बीच यह आयोजन आकर्षण का केंद्र बन गया। गांव के लोगों ने भी उत्साह के साथ इस समारोह में हिस्सा लिया और भोज का आनंद उठाया।

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शाही शादी के बाद मिलेगा अपना पक्का आशियाना

इस शादी की खास बात सिर्फ शाही आयोजन ही नहीं, बल्कि जय और गुड़िया के भविष्य को लेकर विवेक भूषण साहनी की तैयारी भी है। शादी के बाद अब वे अपने दोनों पालतू साथियों के लिए पक्के मकान बनवा रहे हैं जिससे उन्हें सुरक्षित और बेहतर आश्रय मिल सके। जय और गुड़िया अब इस अनोखी कहानी में दूल्हा-दुल्हन बन चुके हैं और उनके लिए अलग से पक्के घर बनवाने की पहल इस आयोजन को और भी खास बना रही है।

इस संदर्भ मे पशुप्रेमी अनुभव शाही ने कहा कि आज के दौर में जहां पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा मानने की परंपरा लगातार बढ़ रही है, वहीं विवेक भूषण साहनी का यह कदम बेजुबानों के प्रति स्नेह और जिम्मेदारी का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।

हालांकि पशु मामलों के विशेषज्ञ भाष्कर यादव का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से समाज में ऐसी परंपराओं को प्रोत्साहन मिल सकता है, जिनका पशुओं के प्राकृतिक जीवन और कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। पशुओं के साथ मानवीय भावनाओं के अनुरूप व्यवहार करने के बजाय उनके स्वाभाविक व्यवहार और प्रकृति में हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना जा सकता।

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