Highlights
रालोद नेता ने बिना नाम लिए सपा पर साधा निशाना
आगरा में विश्वस्तरीय आलू अनुसंधान केंद्र का भरोसा
राज्यसभा चुनावों का किया जिक्र
आईटीआई के आधुनिकीकरण पर दिया जोर
RLD Samajwadi Party Political Remarks: सियासत में शब्दों के वार और रिश्तों की कसौटी पर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के वरिष्ठ नेता ने ऐसा जवाब दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुद्दा दे दिया। राजनीतिक हैसियत पर ‘चवन्नी’ कहकर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “मैं तो ब्रज की रज के बराबर भी नहीं हूं।” ब्रज की मिट्टी की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि इस पावन धरा की रज माथे पर लगाकर देश-दुनिया से आने वाले लोग खुद को धन्य मानते हैं। आगरा में आयोजित कार्यक्रम में उनके बयान के निशाने पर बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी (सपा) रही। उन्होंने राजनीतिक बयानबाजी के बीच पुराने रिश्तों, सहयोग और सम्मान की अहमियत भी याद दिलाई।
रालोद नेता ने कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पुराने सहयोग और संबंधों को भुला दिया जाए। किसी भी दल की ताकत केवल उसके विधायकों और सांसदों की संख्या से नहीं, बल्कि उन कार्यकर्ताओं से भी तय होती है, जो मुश्किल दौर में पार्टी के साथ खड़े रहते हैं।
उन्होंने चौधरी चरण सिंह और चौधरी अजित सिंह की राजनीतिक विरासत का उल्लेख करते हुए रालोद के संघर्ष और संगठन की भूमिका पर जोर दिया। राज्यसभा चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक दौर ऐसा भी था, जब रालोद के विधायक संख्या बल के आधार पर तीन राज्यसभा सीटें जिताने की स्थिति में थे, जबकि अब पार्टी की स्थिति एक सीट तक सिमट गई है।
राजस्थान में कांग्रेस की सरकार के गठन के दौरान रालोद की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने सहयोगी दलों के महत्व को रेखांकित किया। उनके बयान को छोटे दलों की राजनीतिक उपयोगिता और गठबंधन की राजनीति में आपसी सम्मान की जरूरत से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक बयानबाजी के साथ रालोद नेता ने आगरा और आसपास के आलू किसानों की समस्याओं को भी उठाया। उन्होंने कहा कि खेती में लागत और जोखिम लगातार चुनौती बने हुए हैं, जबकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना भी सुनिश्चित नहीं है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आलू किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल राहत दिए जाने का उल्लेख किया। साथ ही आगरा में विश्वस्तरीय आलू अनुसंधान केंद्र स्थापित कराने के प्रयास का भरोसा दिया। इस केंद्र की स्थापना से जुड़ी उम्मीदें क्षेत्र के आलू उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए केवल राहत राशि पर्याप्त नहीं है। आलू के भंडारण की बेहतर व्यवस्था, उपज के प्रभावी विपणन और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना भी जरूरी है। आगरा और आसपास के क्षेत्रों में आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है, ऐसे में अनुसंधान और प्रसंस्करण की सुविधाएं किसानों को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने में मददगार हो सकती हैं।
युवाओं के रोजगार और कौशल विकास के मुद्दे पर उन्होंने सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के आधुनिकीकरण के लिए 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश की योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उद्योगों की भागीदारी से युवाओं को आधुनिक तकनीक के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा सकता है, जिससे उनके लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
आगरा की औद्योगिक पहचान का उल्लेख करते हुए उन्होंने जूता उद्योग और पेठा कारोबार की संभावनाओं की ओर भी ध्यान दिलाया। स्थानीय उद्योगों को आधुनिक प्रशिक्षण, कुशल श्रमिक और बेहतर तकनीकी सहयोग मिलने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
अपने संबोधन में रालोद नेता ने चौधरी चरण सिंह की किसान-केंद्रित राजनीति को मजबूत करने के लिए सभी जातियों और बिरादरियों को साथ लेकर चलने की जरूरत बताई। उन्होंने सामाजिक समरसता और किसानों के हितों को राजनीति के केंद्र में रखने पर जोर दिया।
उन्होंने वीर गोकुलनाथ की गाथा को पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्णय का भी उल्लेख किया। इस तरह आगरा के कार्यक्रम में राजनीतिक रिश्तों और गठबंधन की मर्यादा से लेकर किसान हित, युवाओं के रोजगार और स्थानीय उद्योगों तक कई मुद्दे उठे। हालांकि, उनके संबोधन में सबसे ज्यादा चर्चा ‘चवन्नी’ वाले तंज के जवाब और ब्रज की रज से अपनी तुलना करने वाले बयान को लेकर रही।