आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का प्रदर्शन  (सोर्स- नवभारत लाइव)
आगरा

आगरा नगर निगम में निजी कंपनी को ठेका देने का विरोध, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का प्रदर्शन

Agra Municipal Corporation: नगर निगम में निजी कंपनी को ठेका देने के विरोध में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। सार्वजनिक शौचालय कर्मचारियों को 2 हजार रुपये मजदूरी देने के आरोप की जांच के आदेश

प्रदीप कुमार रावत, स्निग्धा श्रीवास्तव

Highlights:

  • आगरा नगर निगम में निजी कंपनी के टेंडर पर कर्मचारियों का विरोध

  • रोजगार छिनने की आशंका से प्रदर्शन

  • कर्मचारियों को 2हजार रुपये मजदूरी मिलने का आरोप

  • अपर नगर आयुक्त ने जांच के दिए निर्देश

Protest Against Agra Municipal Corporation: आगरा नगर निगम में निजी कंपनियों के जरिए कामकाज कराने की व्यवस्था एक बार फिर विवादों में आ गई है। निजी कंपनी को ठेका दिए जाने की प्रक्रिया के विरोध में नगर निगम के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों को आशंका है कि नई व्यवस्था लागू होने पर वर्षों से नगर निगम में काम कर रहे कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है। इसी चिंता को लेकर कर्मचारी नेताओं ने नगर निगम परिसर में प्रदर्शन कर टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि नगर निगम में पहले से काम कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हितों को नजरअंदाज कर निजी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी की जा रही है। यदि नई कंपनी को ठेका मिलता है तो मौजूदा कर्मचारियों का क्या होगा और उनकी सेवाएं किस शर्त पर जारी रहेंगी, इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। कर्मचारियों ने मांग की कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उनके रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

प्रदर्शन के दौरान अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार ने कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को घबराने की जरूरत नहीं है। अभी तक किसी कंपनी की ओर से आवेदन नहीं किया गया है। ऐसे में फिलहाल कर्मचारियों की नौकरी को लेकर किसी तरह की आशंका पालने की जरूरत नहीं है।

सार्वजनिक शौचालयों के कर्मचारियों की मजदूरी पर भी सवाल

प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक शौचालयों में काम करने वाले कर्मचारियों को कथित तौर पर महज दो हजार रुपये मजदूरी दिए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कर्मचारी नेताओं ने इतनी कम मजदूरी पर नाराजगी जताते हुए उचित भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। उनका सवाल था कि नियमित रूप से काम करने वाले कर्मचारियों को सम्मानजनक और निर्धारित मानकों के अनुरूप मजदूरी क्यों नहीं मिल रही है?

मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार ने मजदूरी से संबंधित शिकायत की जांच सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम को सौंप दी है। जांच के दौरान कर्मचारियों को वास्तव में कितना भुगतान किया जा रहा है और मजदूरी की व्यवस्था किन शर्तों के आधार पर संचालित हो रही है, इसकी पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पहले भी सामने आ चुका है कम मजदूरी का मामला

गौरतलब है कि आगरा नगर निगम के सार्वजनिक शौचालयों में कर्मचारियों के वेतन और श्रम नियमों के पालन का मुद्दा पहले भी उठ चुका है। फरवरी 2026 में सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम के निरीक्षण में कर्मचारियों को चार हजार रुपये वेतन दिए जाने का मामला सामने आया था। निरीक्षण के बाद संबंधित फर्म को नोटिस जारी कर न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप भुगतान और अन्य अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।

अब एक बार फिर सार्वजनिक शौचालयों के कर्मचारियों की मजदूरी को लेकर शिकायत सामने आने से नगर निगम की आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

फिलहाल एक तरफ निजी कंपनी को ठेका दिए जाने की आशंका से कर्मचारी अपने रोजगार को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी तरफ कम मजदूरी का मुद्दा भी जांच के दायरे में है। अब निगाहें सहायक नगर आयुक्त की जांच रिपोर्ट और नगर निगम प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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