जनकपुरी महोत्सव (सोर्स- नवभारत लाइव)
आगरा

जनकपुरी में साकार हुई त्रेता युग की छवि; जनक मंच पर विराजे श्रीराम, राम-सीता के दिव्य स्वरूपों ने मोहा मन

Janakpuri Mahotsav Agra: आगरा के भावना एस्टेट में जनकपुरी महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव में श्रीराम, माता सीता और चारों भाइयों के दिव्य स्वरूपों के दर्शन से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

प्रदीप कुमार रावत, स्निग्धा श्रीवास्तव

Agra Janakpuri Mahotsav 2026: भावना एस्टेट में चल रहे जनकपुरी महोत्सव 2026 में बुधवार की शाम भक्ति, आस्था और भारतीय संस्कृति का ऐसा संगम दिखाई दिया, जिसने श्रद्धालुओं को त्रेता युग की मिथिला की अनुभूति करा दी। जनक मंच पर प्रभु श्रीराम, माता सीता और चारों भाइयों के दिव्य स्वरूपों के विराजमान होते ही पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। श्रीराम के मस्तक पर सुसज्जित सूर्य तिलक और दिव्य मुकुट उनके स्वरूप को विशेष आभा दे रहे थे।

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी की भावपूर्ण प्रस्तुति “देखो अपने रामलला मिथिला आए हैं, हमारे राम आ गए हैं…” जैसे ही जनक मंच से गूंजी, श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। ऐसा प्रतीत हुआ मानो सूर्यवंश के तिलक प्रभु श्रीराम के मिथिला आगमन के साथ ही जनकपुरी का हर कोना राममय हो गया हो।

राजा जनक के आंगन में हुआ श्रीराम का स्वागत

जनक मंच पर प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और माता सीता के स्वरूपों का मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र जी, मधु बघेल, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बृज बहादुर, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार, जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव और स्वागत अध्यक्ष अरविंद शर्मा ने स्वागत एवं अभिनंदन किया।

इसके बाद राजा जनक अशोक कुमार गोयल और रानी सुनैना लता गोयल के साथ आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव और अनीता यादव ने प्रभु श्रीराम सहित सभी स्वरूपों की विधिवत आरती उतारी। आरती के दौरान पूरा जनक मंच जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर प्रभु के दर्शन किए।

149 वर्ष पुरानी रामलीला परंपरा का किया स्मरण

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि आगरा में 149 वर्ष पहले श्रीरामलीला महोत्सव की जो ज्योति जली थी, वह आज भी निरंतर आलोकित है। उन्होंने इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले रामलीला कमेटी और आयोजन से जुड़े सभी लोगों के योगदान की सराहना की।

उन्होंने सेठ कोकामल का विशेष रूप से स्मरण करते हुए कहा कि उनकी परंपरा और योगदान ने आगरा की रामलीला को विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रो. बघेल ने कहा कि आगरा की ऐतिहासिक रामबारात को केवल उत्तर भारत की सबसे बड़ी रामबारात कहना पर्याप्त नहीं है। यह पूरे भारत की सबसे भव्य रामबारात के रूप में अपनी पहचान रखती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन आज भी प्रासंगिक है और उनका चरित्र मर्यादा, कर्तव्य, त्याग, सत्य तथा परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देता है।

जनकपुरी में दिखा नेपाल के जनकपुर जैसा नजारा

भावना एस्टेट में सजाई गई जनकपुरी ने नेपाल के जनकपुर की स्मृतियों को जीवंत कर दिया। भव्य जनक मंच को महलनुमा स्वरूप दिया गया है। विशाल शंकर द्वार से प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को चारों ओर राममय वातावरण नजर आया।

पूरे परिसर में आकर्षक विद्युत सज्जा की गई थी। सड़कों के किनारे श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां लिखी गईं, जबकि विभिन्न झांकियों के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप दिया गया। प्रकाश सज्जा, भजन, चौपाइयां और झांकियां मिलकर जनकपुरी को रामकथा के जीवंत मंच में बदल रही थीं।

जनक मंच पर राम, सांस्कृतिक मंच पर बही कला की गंगा

महोत्सव में जनक मंच पर जहां श्रद्धालु श्रीराम, माता सीता और चारों भाइयों के दिव्य स्वरूपों के दर्शन कर रहे थे, वहीं सांस्कृतिक मंच पर भारतीय कला और संस्कृति की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।

‘इंडिया गॉट टैलेंट’ की विशेष प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इसके साथ ही गणेश वंदना की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया।

दशरथ-कौशल्या के साथ मंच पर विराजे चारों भाई

जनक मंच पर प्रभु श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ विराजमान हुए। माता सीता का स्वरूप भी मंच पर मौजूद रहा। राजा दशरथ के स्वरूप संजय सिंघल और रानी कौशल्या के स्वरूप नीता सिंघल भी मंच पर विराजित थीं।

श्रीराम के मस्तक पर सुसज्जित सूर्य तिलक और दिव्य मुकुट विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव हुआ मानो सूर्यवंश का तेज स्वयं राम के स्वरूप में मिथिला की धरती पर उतर आया हो।

रुचि चतुर्वेदी की कविता ने बांधा भक्ति का समां

कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने अपनी भावपूर्ण काव्य प्रस्तुति से श्रीराम के मिथिला आगमन की अनुभूति को शब्द दिए। उनकी पंक्तियों में भक्ति, वात्सल्य और राम-सीता मिलन की प्रतीक्षा का भाव दिखाई दिया।

“देखो अपने रामलला मिथिला आए हैं, हमारे राम आ गए हैं…” की गूंज के साथ श्रद्धालुओं में भक्ति का भाव और गहरा हो गया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. रुचि चतुर्वेदी और दीपक जैन ने किया।

रोशनी, चौपाइयों और झांकियों से राममय हुआ परिसर

जनकपुरी की सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़, जगमगाती रोशनी, श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां, रामायण प्रसंगों की झांकियां और जनक मंच पर विराजमान प्रभु श्रीराम का दिव्य स्वरूप - हर दृश्य अपनी अलग छटा बिखेर रहा था।

पूरा वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो जनकपुरी में देव सुमन बरस रहे हों और मिथिला के कण-कण से एक ही स्वर निकल रहा हो - राम आ गए हैं।

आयोजन समिति के पदाधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव के साथ अजय अवागढ़, नरेंद्र सिंह सेंगर, अशोक गुप्ता, संजय गोयल, मनोज बंसल, संतोष कटारा, धर्मेश जैन, मनोज जादौन, हितेश लवानियां, मीडिया प्रभारी राणा सुशील सिंह, अरविंद शर्मा, आकाश ग्वाला, पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी, सतीश ठाकुर, रोहन गुप्ता, अनुज भारद्वाज, पंकज पाठक, हेमंत जादौन, भोले चौहान, धीरज शर्मा, धीरज मंगल, रामवली यादव सहित आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।

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