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Agra Land Dispute: आगरा कलेक्ट्रेट के बाद जयपुर हाउस पर छिड़ा विवाद, 100 बीघा जमीन पर राजस्थान सरकार का दावा

Agra Jaipur House Land Dispute: आगरा में जयपुर हाउस की 100 बीघा जमीन पर राजस्थान सरकार ने दावा किया है। शहर के कॉलोनियों और दफ्तर वाले इलाके में 1952 के रिकॉर्ड को लेकर पेंच फंस गया है।

प्रदीप कुमार रावत, अमन मौर्या

Rajasthan Govt Agra Property Claim: आगरा में जमीनों से जुड़े पुराने मालिकाना हक के मामले एक के बाद एक सामने आते दिखाई दे रहे हैं। कलेक्ट्रेट से सटी करीब 10 हजार वर्गगज जमीन को लेकर चल रहा विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं है कि अब जयपुर रियासत की आगरा स्थित करीब 100 बीघा जमीन और ऐतिहासिक संपत्तियों पर राजस्थान सरकार के दावे ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।

एक तरफ जिला प्रशासन कलेक्ट्रेट से लगी जमीन को अपने रिकॉर्ड में सरकारी संपत्ति बता रहा है, वहीं दूसरे पक्ष की ओर से प्रशासन को ही किराएदार बताए जाने का दावा किया गया है। इसी बीच जयपुर राजघराने की पुरानी संपत्तियों का मामला सामने आने से जमीनों के पुराने अभिलेखों की जांच का दायरा और बढ़ गया है।

राजस्थान सरकार ने भी किया दावा

कलेक्ट्रेट से सटी जमीन के मामले में जिलाधिकारी मनीष बंसल की ओर से संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। दूसरे पक्ष ने अपने दावे के समर्थन में पुराने दस्तावेज पेश करते हुए प्रशासन को ही किराएदार बताए जाने का दावा किया है। इस मामले में अभी प्रशासनिक और अभिलेखीय जांच चल रही है।

अब इसी बीच राजस्थान सरकार की ओर से आगरा की जयपुर हाउस कॉलोनी और उससे जुड़ी ऐतिहासिक संपत्तियों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के सामने दावा रखा गया है। राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र के बाद मामला राजस्व परिषद तक पहुंचा और वहां से आगरा प्रशासन से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है।

70-80 साल पुराने रिकॉर्ड से सामने आया नया पेच

जयपुर रियासत का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दावा जिन संपत्तियों को लेकर किया गया है, उनका संबंध आज की आबादी और महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों से बताया जा रहा है। यानी यह केवल खाली जमीन के मालिकाना हक का मामला नहीं है। जिन स्थानों का उल्लेख किया जा रहा है, वहां पिछले कई दशकों में मकान, कॉलोनी, प्रशासनिक भवन और दूसरे सरकारी कार्यालय अस्तित्व में आ चुके हैं।

जयपुर रियासत की ओर से किए गए दावे में आगरा की करीब 100 बीघा जमीन और दो कोठियों समेत मनकामेश्वर क्षेत्र से जुड़ी संपत्तियों का उल्लेख सामने आया है। राजस्थान सरकार ने अपने दावे के आधार के रूप में 1952 में जयपुर रियासत के राजस्थान में विलय से संबंधित दस्तावेजों का हवाला दिया है। अब प्रशासन को पुराने दस्तावेजों और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड का मिलान करना होगा।

जहां जमीन बताई जा रही है, वहां खड़े हैं भवन

मामले का सबसे बड़ा पेंच यही है कि जिन जमीनों का संबंध जयपुर रियासत से बताया जा रहा है, वहां आज जमीन का स्वरूप वैसा नहीं है जैसा कई दशक पहले रहा होगा। जयपुर हाउस क्षेत्र में बड़ी संख्या में आवासीय निर्माण हो चुके हैं। इसके अलावा एडीए से जुड़े भवन, जीएसटी कार्यालय और अन्य प्रशासनिक उपयोग वाली संपत्तियां भी इस क्षेत्र से जुड़ी बताई जा रही हैं। मनकामेश्वर रोड और मंदिर से संबंधित भूमि का उल्लेख भी दावे में सामने आया है।

ऐसे में प्रशासन के सामने अब सिर्फ यह पता लगाने की चुनौती नहीं है कि जमीन मूल रूप से किसके नाम दर्ज थी, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वर्षों के दौरान उस जमीन का स्वरूप कैसे बदला, किस स्तर पर आवंटन या हस्तांतरण हुआ, किन अभिलेखों के आधार पर निर्माण हुए और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में जमीन की स्थिति क्या है।

नगर निगम और एडीए से मांगी गई पत्रावलियां

राजस्थान सरकार के पत्र के बाद जिलाधिकारी मनीष बंसल ने संबंधित विभागों से अभिलेख तलब किए हैं। नगर निगम और आगरा विकास प्राधिकरण से जयपुर हाउस तथा संबंधित संपत्तियों से जुड़ी पुरानी पत्रावलियां उपलब्ध कराने को कहा गया है। प्रशासन इन रिकॉर्ड के जरिए जमीन की पुरानी स्थिति और वर्तमान स्थिति का मिलान कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

एडीएम प्रशासन आजाद भगत सिंह के मुताबिक नगर निगम और एडीए को मामले से संबंधित पूरी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों विभागों से उपलब्ध अभिलेख और पत्रावलियां जल्द उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि शासन को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जा सके।

कलेक्ट्रेट विवाद के बाद जयपुर हाउस ने बढ़ाई चुनौती

एक तरफ कलेक्ट्रेट से सटी जमीन को लेकर प्रशासन और दूसरे पक्ष के दावों में विरोधाभास सामने आया है। दूसरे पक्ष ने प्रशासन को ही किराएदार बताए जाने का दावा किया है। अब जयपुर रियासत की संपत्तियों को लेकर सामने आया दावा प्रशासन के लिए अलग तरह की चुनौती लेकर आया है, क्योंकि यहां मामला केवल जमीन के पुराने कागजों तक सीमित नहीं है।

ऐसे में यदि पुराने अभिलेखों में जयपुर रियासत से जुड़ी संपत्तियों का उल्लेख मिलता है तो प्रशासन को यह भी देखना होगा कि आज उन संपत्तियों की कानूनी और राजस्व स्थिति क्या है। दशकों के दौरान हुए आवंटन, निर्माण, नामांतरण, हस्तांतरण और सरकारी उपयोग से जुड़े दस्तावेज इस पूरी पड़ताल में महत्वपूर्ण होंगे।

प्रशासन ने शुरू की रिकॉर्ड जुटाने की प्रक्रिया

फिलहाल राजस्थान सरकार का दावा सामने आया है और उत्तर प्रदेश प्रशासन ने रिकॉर्ड जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है। स्वामित्व का अंतिम निर्धारण अभिलेखों और लागू कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

ऐसे में अब निगाहें उन पुरानी पत्रावलियों पर टिक गई हैं, जो यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं कि आज जिन जमीनों पर कॉलोनियां और सरकारी भवन खड़े हैं, उनके पीछे 70-80 साल पहले की जमीन की कहानी क्या थी और मौजूदा रिकॉर्ड उस कहानी को किस तरह दर्ज करते हैं।

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