Ramlila Maidan History: कभी तालाब था रामलीला मैदान, नेहरू से जेपी और अन्ना आंदोलन तक की कहानी

Ramlila Maidan Political Rallies: दिल्ली का रामलीला मैदान कई ऐतिहासिक राजनीतिक आंदोलनों और रैलियों का गवाह रहा है। जानिए नेहरू, शास्त्री, जेपी, अन्ना हजारे और बाबा रामदेव से जुड़ा इसका इतिहास।
india bloc railly ramleela maidan
रामलीला मैदानSource- X/INCINDIA
Published on: 
Updated on: 

Highlights

  • 1930 के दशक से पहले रामलीला मैदान की जगह एक बड़ा तालाब हुआ करता था।

  • 1961 में जवाहरलाल नेहरू ने महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का यहां स्वागत किया था।

  • जेपी आंदोलन, आपातकाल के विरोध और अन्ना हजारे के आंदोलन का भी यह मैदान गवाह रहा है।

History of Ramlila Maidan Delhi: इंडिया गठबंधन में शामिल विपक्षी दल रविवार (1 नवंबर) को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में विपक्षी नेताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। रैली का उद्देश्य चुनाव में कथित गड़बड़ियों को लेकर चिंता जताना, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध करना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना है।

इस रैली के लिए विपक्षी दलों ने 'चलो दिल्ली' मार्च का भी आयोजन किया है। मार्च मिंटो रोड से शुरू होकर रामलीला मैदान पहुंचेगा। इस प्रदर्शन में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेताओं के शामिल होने की जानकारी है।

रामलीला मैदान सिर्फ एक रैली स्थल नहीं है, बल्कि देश के राजनीतिक इतिहास का अहम गवाह भी रहा है। करीब 12 एकड़ में फैला यह मैदान धार्मिक आयोजनों, राजनीतिक रैलियों और जन आंदोलनों का केंद्र रहा है। यहां कभी जवाहरलाल नेहरू ने महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का स्वागत किया था, तो कभी जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंका था। अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलन भी इसी मैदान से जुड़े रहे हैं।

कभी तालाब हुआ करता था रामलीला मैदान

दिल्ली का रामलीला मैदान 1930 के दशक से पहले एक बड़ा तालाब हुआ करता था। बाद में इसे पाटकर मैदान में बदल दिया गया। इतिहासकारों के मुताबिक, लाल किले के पीछे यमुना के बाढ़ क्षेत्र में होने वाली रामलीला को यहां स्थानांतरित किया गया था। इसके बाद यह जगह धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सार्वजनिक सभाओं और राजनीतिक रैलियों का प्रमुख केंद्र बन गई।

नेहरू ने किया था महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का स्वागत

रामलीला मैदान ने कई ऐतिहासिक और राजनीतिक कार्यक्रमों की मेजबानी की है। वर्ष 1961 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का इसी मैदान में स्वागत किया था।

वर्ष 1965 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने रामलीला मैदान से 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया था। यह नारा देश में जवानों और किसानों के योगदान को सम्मान देने के लिए दिया गया था।

कश्मीर सत्याग्रह से जुड़ा रहा मैदान

वर्ष 1952 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने रामलीला मैदान में कश्मीर सत्याग्रह का नेतृत्व किया था। इस आंदोलन में जम्मू-कश्मीर में प्रवेश के लिए लागू परमिट व्यवस्था का विरोध किया गया था। मुखर्जी ने इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ पूर्ण एकीकरण की मांग उठाई थी।

india bloc railly ramleela maidan
Delhi Rally Live: रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली, राहुल ने CEC पर वोट चोरी का लगाया गंभीर आरोप

आपातकाल से पहले की ऐतिहासिक रैली

25 जून 1975 को रामलीला मैदान में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ एक बड़ी रैली को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की मशहूर पंक्ति 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है' सुनाई थी।

जेपी ने इस रैली में सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का आह्वान किया था। इसी रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू कर दिया। इस घटना ने रामलीला मैदान को भारतीय राजनीति के इतिहास में एक खास पहचान दिलाई।

आपातकाल के बाद जनता पार्टी की बड़ी रैली

फरवरी 1977 में आपातकाल हटने के बाद विपक्षी नेता एक बार फिर रामलीला मैदान में जुटे। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुई इस बड़ी रैली में जनता पार्टी के समर्थन में लोगों से एकजुट होने की अपील की गई। इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी ने जीत हासिल की और देश में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।

india bloc railly ramleela maidan
दिल्ली में आज कांग्रेस की महारैली, 14 जोन, 400 ड्रोन, 4000 पुलिसकर्मी तैनात, रामलीला मैदान में सियासी संग्राम

2011 में अन्ना हजारे आंदोलन

वर्ष 2011 में रामलीला मैदान एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने यहां भ्रष्टाचार के खिलाफ और मजबूत लोकपाल कानून बनाने की मांग को लेकर अनशन किया था। उनके आंदोलन को देशभर में समर्थन मिला और यह भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का बड़ा केंद्र बन गया।

इसी साल बाबा रामदेव ने भी भ्रष्टाचार और विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने की मांग को लेकर यहां सत्याग्रह शुरू किया था। हालांकि, इस प्रदर्शन के दौरान आधी रात को पुलिस ने कार्रवाई की और लाठीचार्ज हुआ। इस घटना ने भी देशभर में राजनीतिक बहस छेड़ दी।

पेंशन, किसान और मजदूर आंदोलन

रामलीला मैदान में समय-समय पर कर्मचारी, किसान और मजदूर संगठन भी अपनी मांगों को लेकर जुटते रहे हैं। वर्ष 2023 में पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को लेकर बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी यहां आयोजित पेंशन शंखनाद महारैली में शामिल हुए थे।

इसके अलावा 2023 और 2024 में किसानों और मजदूर संगठनों की संयुक्त रैलियां भी आयोजित की गईं। इन प्रदर्शनों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और श्रम कानूनों में बदलाव जैसी मांगें उठाई गई थीं।

इस तरह रामलीला मैदान ने देश के राजनीतिक इतिहास के कई बड़े दौर देखे हैं। अब इंडिया गठबंधन की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली के साथ यह मैदान एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है।