Highlights
नवभारत की खबर के बाद प्रयागराज तक मचा हड़कंप
रेलवे ने शुरू कराई पुनर्निर्माण की तैयारी
वैकल्पिक मार्ग पर धूल के गुबार बने नई मुसीबत
जर्जर गार्डरों की मरम्मत के लिए बंद हुआ ROB
Agra Railway Overbridge Closed: आखिरकार नवभारत की खबर का बड़ा असर दिखाई दिया। ईदगाह बस अड्डा चौराहे को खेरिया मोड़ से जोड़ने वाले रेलवे ओवरब्रिज (ROB) को 90 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। रेलवे के ब्रिज विभाग की ओर से इस पुल के रेलवे वाले हिस्से का पुनर्निर्माण किया जाएगा और जर्जर गार्डरों को बदला जाएगा। लंबे समय से खस्ताहाल पुल से भारी वाहनों की आवाजाही जारी थी। ऐसे में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। इसके बावजूद पुल पर यातायात जारी रहने से रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे।
नवभारत ने इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर में पुल के जर्जर गार्डरों की स्थिति और हादसे की आशंका को सामने लाया गया। इसके बाद आगरा से लेकर प्रयागराज तक रेलवे के अधिकारियों में हलचल तेज हुई और पुल की मरम्मत तथा गार्डर बदलने का काम तत्काल शुरू कराने के निर्देश दिए गए। आखिरकार रेलवे को पुल पर यातायात बंद कर पुनर्निर्माण की दिशा में कदम उठाना पड़ा।
ईदगाह–खेरिया मोड़ ROB आगरा के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन इस पुल से गुजरते हैं। इनमें भारी वाहन ही नहीं, स्कूली बच्चों को ले जाने वाली वैन और मिनी बसें भी शामिल हैं। पुल के रेलवे वाले हिस्से के गार्डर जर्जर हो चुके थे। नवभारत ने अपनी रिपोर्ट के माध्यम से इनकी वास्तविक स्थिति उजागर करते हुए संभावित खतरे की ओर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान खींचा था।
सवाल यह है कि जब पुल की हालत इतनी खराब थी और भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी थी, तब समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही रेलवे प्रशासन की नींद टूटती? नवभारत की खबर के बाद कार्रवाई होना इस बात को रेखांकित करता है कि समय रहते सामने लाई गई जनहित की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना कितना जरूरी है।
ROB को बंद करने की प्रक्रिया में रेलवे के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी भी सामने आई। रेलवे ने समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर जानकारी दी थी कि पुल को मंगलवार सुबह नौ बजे से 90 दिनों के लिए बंद किया जाएगा। लेकिन निर्धारित समय पर पुल को कुछ समय के लिए बंद करने के बाद फिर खोल दिया गया। बाद में मंगलवार देर रात से इसे दोबारा बंद कर दिया गया।
इस घटनाक्रम ने रेलवे के विभागों के बीच तालमेल को लेकर सवाल खड़े कर दिए। जब पुल की मरम्मत के लिए बंद करने का निर्णय लिया जा चुका था, तो यातायात को लेकर ऐसी असमंजस की स्थिति क्यों बनी? जिस पुल पर जर्जर गार्डरों के कारण खतरे की आशंका जताई जा रही थी, वहां कुछ समय के लिए भी यातायात दोबारा शुरू होना गंभीर चिंता का विषय है। इस दौरान स्कूली बच्चों को ले जाने वाली वैन और मिनी बसें भी इसी रास्ते से गुजरती रहीं। ऐसे में किसी अनहोनी की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होती?
पुल बंद होने के बाद अब वाहन चालकों को अर्जुन नगर, बारहखंभा और नगला छउआ होते हुए ईदगाह की ओर जाना होगा। रेलवे ने इस वैकल्पिक मार्ग की जानकारी दी है। हालांकि, रास्ता बदलने के साथ ही स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।
इस मार्ग पर भी ROB का निर्माण कार्य चल रहा था, जिसे बंद कर दिया गया है। लेकिन सड़क की मरम्मत और धूल पर नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाने से यहां धूल के गुबार उड़ रहे हैं। ऐसे में अगले 90 दिनों तक इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन चालकों के साथ आसपास रहने वाले लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
सड़क पर उड़ती धूल से सांस संबंधी समस्याओं और आंखों में जलन जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति अधिक मुश्किल पैदा कर सकती है। ऐसे में वैकल्पिक मार्ग को सुचारु बनाने के साथ सड़क की मरम्मत, नियमित सफाई और धूल नियंत्रण के इंतजाम करना भी जरूरी है।
आगरा में वायु प्रदूषण और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल लंबे समय से चिंता का विषय रही है। सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के अनुरूप निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय करना आवश्यक है। शहर में धूल प्रदूषण के मामलों में नगर निगम और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन पर कार्रवाई तथा जुर्माने के मामले भी सामने आते रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि रेलवे के इस वैकल्पिक मार्ग पर उड़ती धूल को रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं? क्या सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव होगा? क्या क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और सफाई कराई जाएगी? यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो ROB बंद होने से पैदा हुई यातायात की परेशानी के साथ धूल प्रदूषण भी स्थानीय लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।
ईदगाह-खेरिया मोड़ ROB को 90 दिनों के लिए बंद करना जर्जर पुल के पुनर्निर्माण की दिशा में जरूरी कदम है। लेकिन रेलवे की जिम्मेदारी केवल गार्डर बदलने तक सीमित नहीं है। निर्माण कार्य को तय समय में पूरा करना, वैकल्पिक मार्ग पर यातायात को व्यवस्थित रखना और धूल प्रदूषण रोकने के प्रभावी इंतजाम करना भी उतना ही जरूरी है।
नवभारत की खबर के बाद पुल के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन इस कार्रवाई को कितनी तेजी और जिम्मेदारी से पूरा करता है। साथ ही, क्या वैकल्पिक मार्ग की बदहाल स्थिति में सुधार होगा या अगले 90 दिनों तक स्थानीय लोगों और राहगीरों को धूल के गुबार के बीच ही सफर करने को मजबूर होना पड़ेगा?