Anjuman Mohammadiya Society Waqf Property Agra: आगरा में कलेक्ट्रेट परिसर से सटी करीब 10 हजार वर्गमीटर बेशकीमती जमीन को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को नया मोड़ आ गया। जिला प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के जवाब में अंजुमन मोहमदिया सोसाइटी के सहायक सचिव हाजी जमीलुद्दीन कुरैशी कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपने पक्ष से दस्तावेज प्रशासन को उपलब्ध कराए।
सोसाइटी का दावा है कि विवादित जमीन वर्ष 1919 से उनके कब्जे में है और इसके संबंध में नक्शा समेत अन्य अभिलेख उनके पास मौजूद हैं।
जिला प्रशासन ने सोसाइटी सहित संबंधित पक्षों को 14 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया था। हाजी जमीलुद्दीन कुरैशी ने बताया कि उन्होंने सोमवार को प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष और उपलब्ध दस्तावेज पेश कर दिए हैं। उनके अनुसार मामले में अगली तारीख 31 सितंबर बताई गई है।
नव भारत से विशेष बातचीत में हाजी जमीलुद्दीन कुरैशी ने प्रशासन के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह जमीन अंग्रेजों के जमाने से उनके कब्जे और प्रबंधन में रही है। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे दस्तावेज मौजूद हैं, जिनके आधार पर वह जमीन पर अपना अधिकार साबित करने का दावा कर रहे हैं। कुरैशी ने कहा कि जिस पक्ष को वह जमीन का वास्तविक मालिक मानते हैं, उसी को अब उल्टा आरोपी बनाकर अवैध कब्जाधारी बताया जा रहा है।
बताते चलें कि आगरा प्रशासन लंबे समय से ऐसी उपयुक्त जमीन की तलाश में है, जहां पुलिस कमिश्नरेट और कलेक्ट्रेट को एक ही परिसर या आसपास विकसित किया जा सके, ताकि आम जनता को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसी क्रम में बीते दिनों एक शिकायत के बाद जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कलेक्ट्रेट परिसर का निरीक्षण किया था।
प्रशासनिक जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर प्रशासन ने दावा किया कि कलेक्ट्रेट परिसर की कुल करीब 30 हजार वर्गमीटर भूमि में से लगभग 10 हजार वर्गमीटर जमीन पर अंजुमन मोहमदिया सोसाइटी और अन्य पक्षों का कब्जा है। प्रशासन इसे सरकारी भूमि बताते हुए कब्जे को अवैध मान रहा है।
प्रशासन के अनुसार इस विवादित भूमि पर सोसाइटी की ओर से दो स्कूल और कई दुकानें संचालित की जा रही हैं। इसी आधार पर प्रशासन ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे।
दूसरी ओर अंजुमन मोहमदिया सोसाइटी का कहना है कि विवादित संपत्ति वक्फ नंबर 152 और गाटा संख्या 431 के अंतर्गत आती है। सोसाइटी पक्ष पहले भी दावा कर चुका है कि तहसील सदर के अभिलेखों में जमीन नजूल की नहीं है और इसके मूल मालिक ग्यास अहमद थे, जिन्होंने इसे वक्फ कर दिया था। अब प्रशासन और सोसाइटी के दावों के बीच दस्तावेजों की जांच अहम होगी।
प्रशासन जमीन को सरकारी संपत्ति बताते हुए कार्रवाई की बात कह रहा है, जबकि अंजुमन मोहमदिया सोसाइटी इसे अपनी वक्फ संपत्ति बता रही है। कलेक्ट्रेट से सटी इस बेशकीमती जमीन का वास्तविक मालिकाना हक किसके पास है, इसका विवाद अब दस्तावेजों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर आगे तय होगा।