

Agra Next Generation Female Cricketers: क्रिकेट भारत में यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं का हिस्सा है। टी-20 हो, वनडे या टेस्ट - मैदान पर उतरते 11 खिलाड़ियों के साथ पूरा देश धड़कता है। इस खेल में किसी की जिंदगी रातों-रात बदल जाती है तो कोई वर्षों तक संघर्ष के बाद अपनी पहचान बनाता है। लेकिन चमकते सितारों के पीछे घंटों का अभ्यास, अनुशासन, धैर्य और समर्पण छिपा होता है। आगरा में क्रिकेट की इसी तपती भट्ठी में अब बेटियों की एक नई पौध तैयार हो रही है, जो आने वाले दिनों में भारतीय क्रिकेट का चेहरा बन सकती है।
ताज नगरी की क्रिकेट यात्रा में महिलाओं की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान रह चुकीं हेमलता काला ने आगरा में बेटियों के लिए क्रिकेट का रास्ता तैयार किया। उनके बाद दीप्ति शर्मा और पूनम यादव जैसी खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगरा का नाम रोशन किया। अब इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए कई बेटियां मैदान पर सुबह चार बजे से पसीना बहा रही हैं। इनमें कुछ उत्तर प्रदेश तो कुछ दूसरे राज्यों की अंडर-15, अंडर-19 और अंडर-23 टीमों में अपनी जगह बना चुकी हैं।
मलपुरा स्थित केके शर्मा क्रिकेट अकादमी में पहुंचने पर क्रिकेट का अलग ही संसार नजर आता है। सुबह का अंधेरा छंटने से पहले ही मैदान पर खिलाड़ी पहुंच जाते हैं। एक तरफ लड़के अभ्यास करते दिखाई देते हैं तो दूसरी तरफ बेटियां गेंद, बल्ले और विकेट के साथ अपने सपनों को आकार देती नजर आती हैं। यहां प्रशिक्षण लेने वाली कई खिलाड़ी करीब 10 घंटे तक अभ्यास कर रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और लंबे समय तक रेलवे क्रिकेट से जुड़े रहे केके शर्मा ने बेटियों को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। उनका जोर सिर्फ क्रिकेट की तकनीक सिखाने पर नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के अनुशासन, फिटनेस, मानसिक मजबूती और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता विकसित करने पर है। बेटियों को प्रशिक्षण के साथ कई सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराने का उनका प्रयास इस अभियान को और खास बनाता है।
केके शर्मा का कहना है कि आगरा में महिला क्रिकेट की शुरुआत हेमलता काला ने जिस दौर में की, उसने आगे आने वाली पीढ़ी के लिए रास्ता बनाया। आज उसी प्रेरणा का परिणाम है कि बेटियां घरों से निकलकर क्रिकेट के मैदान में अपने लिए जगह बना रही हैं।
अकादमी में प्रशिक्षण लेने वाली खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस बदलाव की कहानी खुद बयां करती हैं। आगरा की मिष्टी उत्तर प्रदेश की अंडर-19 और अंडर-23 टीम का हिस्सा हैं। वैष्णवी हिमाचल प्रदेश की अंडर-19 टीम में खेल रही हैं। ईशानी भी हिमाचल की अंडर-19 और अंडर-23 टीम में अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं।
मान्या जम्मू-कश्मीर की अंडर-19 टीम के साथ जुड़ी हैं और अपनी तकनीक को और धार देने के लिए राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में भी प्रशिक्षण ले रही हैं। शिखा असम की अंडर-15 टीम की सदस्य हैं, जबकि नव्या और आराध्या मध्य प्रदेश की टीम में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। इनके अलावा भी आधा दर्जन से अधिक ऐसी प्रशिक्षु खिलाड़ी हैं, जो उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों की टीमों में जगह बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं।
इनमें कई खिलाड़ी ऑलराउंडर हैं। यानी गेंद हाथ में आते ही विपक्षी बल्लेबाजों को चुनौती और बल्ला हाथ में आते ही गेंदबाजों पर हमला। कुछ खिलाड़ी बल्लेबाजी, कुछ गेंदबाजी और कुछ विकेटकीपिंग में अपनी पहचान बना रही हैं। यही बहुआयामी प्रतिभा इन्हें भविष्य के लिए मजबूत दावेदार बनाती है।
ग्राउंड पर अभ्यास कर रहीं वैष्णवी, मिष्टी चौधरी, काकुल और छवि ने बताया कि क्रिकेट के इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं है। सुबह चार बजे मैदान पर पहुंचना, घंटों अभ्यास करना और लगातार अपनी कमियों को सुधारना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। खिलाड़ियों के मुताबिक, केके शर्मा सिर्फ कोच की भूमिका नहीं निभाते, बल्कि अभिभावक की तरह हर छोटी-बड़ी जरूरत में उनके साथ खड़े रहते हैं।
खिलाड़ियों का कहना है कि अभ्यास के दौरान उन्हें क्रिकेट की छोटी से छोटी बारीकी पर काम कराया जाता है, ताकि मैच के दबाव में भी उनका प्रदर्शन प्रभावित न हो। लंबे अभ्यास सत्र में तकनीक के साथ मानसिक मजबूती पर भी ध्यान दिया जाता है।
आगरा की महिला क्रिकेट को नई ऊंचाई देने में कोच मनोज कुशवाहा के योगदान को भी खिलाड़ी और प्रशिक्षक महत्वपूर्ण मानते हैं। पूनम यादव और राशि कनौजिया सहित दर्जनों प्रतिभाओं को तैयार करने में उनकी भूमिका रही है। इसी कड़ी में अब नई पीढ़ी की खिलाड़ी अपने सपनों को पंख लगाने में जुटी हैं।
केके शर्मा का प्रयास उस सोच से आगे बढ़ता दिखाई देता है, जिसमें बेटियों को केवल मैदान तक लाना ही लक्ष्य नहीं, बल्कि उन्हें प्रतिस्पर्धी क्रिकेट के लिए तैयार करना उद्देश्य है। उनका ‘क्रिकेट सिखाओ, आगे बढ़ाओ’ अभियान आर्थिक रूप से कमजोर या प्रतिभाशाली बेटियों के लिए अवसर का रास्ता खोलने की कोशिश है।
आगरा की क्रिकेट कहानी में हेमलता काला ने जिस दौर में महिला क्रिकेट की नींव मजबूत की, उसके बाद दीप्ति शर्मा और पूनम यादव ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाई। अब मिष्टी, वैष्णवी, ईशानी, मान्या, शिखा, नव्या, आराध्या और उनकी साथी खिलाड़ी उसी कहानी का अगला अध्याय लिखने में जुटी हैं।
इन बेटियों के लिए दीप्ति शर्मा और पूनम यादव आदर्श हैं। आज वे उनके खेल को देखकर मैदान में उतरती हैं। कल इनमें से कोई भारतीय जर्सी पहनकर उसी तिरंगे के नीचे खड़ी दिखाई दे, तो यह आगरा के लिए सिर्फ उपलब्धि नहीं, बल्कि उस लंबी क्रिकेट यात्रा का अगला पड़ाव होगा, जिसकी शुरुआत ताज नगरी में महिला क्रिकेट को पहचान दिलाने वाली हेमलता काला से हुई थी।