MACT Claim : हर दिन देशभर में सड़क हादसों की खबरें सामने आती हैं। तेज रफ्तार, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और लापरवाही के कारण कई लोग घायल हो जाते हैं, जबकि कई लोगों की जान चली जाती है। ऐसे मामलों में कानून पीड़ितों और उनके परिवारों को मुआवजा लेने का अधिकार देता है, लेकिन जानकारी के अभाव में कई लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल होता है तो उसे तुरंत पुलिस में एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। वहीं यदि हादसे में मौत हो जाती है तो मृतक के परिवार वाले शिकायत दर्ज कराकर आगे की कार्रवाई कर सकते हैं।
इसके बाद पीड़ित व्यक्ति या मृतक के परिवारजन मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल यानी एमएसीटी में मुआवजे के लिए दावा दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए एफआईआर की कॉपी, मेडिकल रिपोर्ट, इलाज के बिल, आय प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और दुर्घटना से जुड़े सबूत जरूरी होते हैं।
अदालत इन दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच करती है। घायल व्यक्ति को अस्पताल खर्च, दवाइयों का खर्च, इलाज के दौरान हुई आय की हानि, भविष्य के इलाज का खर्च, आने-जाने का खर्च और शारीरिक व मानसिक पीड़ा के लिए भी मुआवजा मिल सकता है।
ये खबर भी पढ़ें : EPFO का बड़ा बदलाव, अब सालों पुराने PF खाते से भी मिलेगा पैसा, टेंशन खत्म करेगा नया E-PRAAPTI Portal
अगर सड़क दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके परिवार को आश्रय की हानि, अंतिम संस्कार खर्च और भावनात्मक नुकसान के आधार पर मुआवजा दिया जा सकता है। इसकी गणना मृतक की आय, उम्र, आश्रितों की संख्या और भविष्य की कमाई की संभावना के आधार पर होती है।
पति या पत्नी, बच्चे और माता-पिता क्लेम कर सकते हैं। वहीं स्थायी विकलांगता होने पर उम्र, आय और विकलांगता की गंभीरता के आधार पर राशि तय होती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हादसे के बाद सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें, समय पर दावा करें और कानूनी सलाह जरूर लें।