Affordable Health Insurance Cover: संसद की स्वास्थ्य समिति ने मध्यम वर्ग के लिए 'आरोग्य संजीवनी' जैसी सस्ती स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को बढ़ावा देने की कड़ी सिफारिश की है। इस संबंध में समिति ने संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की है, ताकि आम जनता को समय पर उचित स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सके।
समिति का मानना है कि देश का एक बहुत बड़ा मध्यम वर्ग वर्तमान में किसी भी सरकारी या निजी स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में नहीं आता है। ऐसे में गंभीर बीमारी या आपातकाल की स्थिति में उन्हें अपनी जेब से भारी खर्च उठाना पड़ता है, जिससे उनका पूरा बजट बिगड़ जाता है।
समिति ने प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के खर्च को कम करने के लिए कड़े नियम बनाने का बड़ा सुझाव दिया है। इसके तहत सभी निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए एक पारदर्शी और मानक इलाज पैकेज दरें तय की जानी चाहिए, जिससे इलाज के नाम पर मनमाना चार्ज न वसूला जा सके।
संसदीय समिति ने आयुष्मान भारत (AB-PMJAY) योजना के तहत दी जाने वाली चिकित्सा सुविधाओं और पैकेज दरों में भी समय-समय पर आवश्यक समीक्षा करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल महंगाई और इलाज में नई तकनीकों की बढ़ती लागत को देखते हुए दरों में बदलाव होना चाहिए।
आंकड़ों के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक 11 करोड़ से अधिक मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने के मामलों को मंजूरी दी जा चुकी है। इस योजना से देश भर के कुल 38,038 सरकारी और निजी अस्पताल जुड़े हैं और अब तक 1.57 लाख करोड़ रुपये के इलाज को हरी झंडी मिली है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में निजी अस्पतालों में एक बार भर्ती होने पर औसतन 34,064 रुपये का खर्च आता है। देश में मेडिकल महंगाई की दर प्रति वर्ष लगभग 10-13% बनी हुई है। हालांकि, कुल स्वास्थ्य खर्च में जेब से होने वाले खर्च की हिस्सेदारी 2014 के 62.6% से घटकर अब 43.4% रह गई है।
इस अवधि के दौरान प्रति व्यक्ति सरकारी स्वास्थ्य खर्च भी 1,108 रुपये से बढ़कर 2,786 रुपये पर पहुंच गया है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम से मरीजों को 10,102 करोड़ रुपये की बचत हुई है। समिति ने राज्यों को भी अपने बजट का कम से कम 8% हिस्सा स्वास्थ्य पर खर्च करने को कहा है।
समिति ने प्रत्येक ब्लॉक में जन औषधि केंद्र खोलने और अस्पतालों में अमृत फार्मेसी को बढ़ावा देने की सिफारिश की है। इसके साथ ही, आयुष इलाज को भी योजना के पैकेज में शामिल करने और लाभार्थियों पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को समाप्त करने की बात कही है।