

TRAI 1601 Series Rules: भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई ने देश में मोबाइल नंबरों के जरिए होने वाले ऑनलाइन फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। ट्राई ने यूटिलिटी सर्विस देने वाली कंपनियों के लिए अब 1601 नंबर सीरीज को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है।
ट्राई के इस नए नियम से ग्राहकों को फर्जी कॉल्स से राहत मिलेगी और वे असली सर्विस कॉल्स को आसानी से पहचान सकेंगे। इसके लिए टेलीकॉम ऑपरेटरों को पूरी जांच-पड़ताल और लिखित गारंटी लेने के बाद ही पात्र यूटिलिटी प्रदाताओं को यह विशेष नंबर आवंटित करने का निर्देश दिया गया है।
अब तक केवल बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और सरकारी विभागों के लिए ही 1600 नंबर सीरीज रिजर्व रखी गई थी। लेकिन बीएफएसआई कॉल्स की संवेदनशीलता को देखते हुए ट्राई ने अब अलग से 1601 सीरीज बनाई है। पहले चरण में इसमें बिजली वितरण, जलापूर्ति, गैस और कूरियर जैसी यूटिलिटी कंपनियों को शामिल किया गया है।
ट्राई ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1601 सीरीज वाले इन नंबरों का इस्तेमाल किसी भी तरह के प्रमोशनल कॉल्स के लिए नहीं किया जा सकेगा। इन नंबरों से केवल महत्वपूर्ण सर्विस, डिलीवरी स्टेटस और ट्रांजैक्शन से संबंधित कॉल्स ही की जा सकेंगी, जिससे ग्राहकों को धोखाधड़ी से सुरक्षा मिलेगी।
नए नियमों के तहत ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे 1601 सीरीज के नंबर केवल सीधे पात्र यूटिलिटी कंपनियों को ही आवंटित करें। इस प्रक्रिया में किसी भी एग्रीगेटर या बिचौलिए को शामिल होने की अनुमति नहीं होगी, जिससे नंबरों के दुरुपयोग की गुंजाइश खत्म हो सके।
सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों को इस निश्चित बदलाव के लिए केवल 90 दिनों का समय दिया गया है। टेलीकॉम कंपनियों को इस अवधि के भीतर सभी पात्र यूटिलिटी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन और इस नई सीरीज पर माइग्रेशन पूरा कराना होगा ताकि नए सुरक्षा नियमों को समय पर लागू किया जा सके।
हाल के दिनों में कॉलर आईडी ऐप्स जैसे ट्रूकॉलर द्वारा 140 और 1600 सीरीज के आवश्यक नंबरों पर स्पैम टैग दिखाए जाने से बड़ा विवाद खड़ा हुआ था। अब इस पर ट्राई ने अपना रुख बेहद सख्त कर दिया है। ट्राई ने साफ कहा है कि आवश्यक सेवाओं वाले इन नंबरों पर किसी भी प्रकार का कोई स्पैम टैग नहीं लगाया जाना चाहिए।
ये नंबर ग्राहकों को सुरक्षा अलर्ट और लेनदेन की पुष्टि भेजने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इस नए कदम से जहां अपराधियों के हौसले पस्त होंगे, वहीं जनता को ऑनलाइन फर्जीवाड़ों से एक बड़ा और प्रभावी सुरक्षा कवच मिलेगा, जिससे डिजिटल लेन-देन भी सुरक्षित होगा।