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दिल्ली ब्लास्ट के नाम पर डराया, रिटायर्ड अफसर से 16.50 लाख उड़ाए, जानिए साइबर ठगों का नया खतरनाक तरीका

Delhi Blast Cyber ​​Scam: साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) से रिटायर्ड एक बुजुर्ग अधिकारी को लाखों रुपये की चपत लग गई।

सिमरन सिंह

Cyber ​​Fraud Case By Delhi Blast Name: साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) से रिटायर्ड एक बुजुर्ग अधिकारी को लाखों रुपये की चपत लग गई। इस बार साइबर ठगों ने "दिल्ली ब्लास्ट" का डर दिखाकर शिकार को फंसाया और अंत में 16.50 लाख रुपये ठग लिए। यह तरीका इतना खतरनाक और शातिर है कि कोई भी आम नागरिक इसकी चपेट में आ सकता है।

खुद को ATS और NIA अधिकारी बताकर किया संपर्क

मामले में साइबर क्रिमिनल्स ने खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का अधिकारी बताया। ठगों ने मुंबई में रहने वाले 75 साल के एक रिटायर्ड अधिकारी को फोन किया और दावा किया कि हाल ही में हुए दिल्ली ब्लास्ट के आरोपियों की लिस्ट में उनका नाम शामिल है।

सोमवार को दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत

पीड़ित ने सोमवार को अंधेरी स्थित पुलिस स्टेशन पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, पीड़ित को 11 दिसंबर को एक अनजान नंबर से कॉल आया था, जिसके बाद ठगी की यह पूरी साजिश शुरू हुई।

डर और धमकी से तोड़ा गया मानसिक संतुलन

कॉलर ने खुद को दिल्ली ATS से जुड़ा अधिकारी बताते हुए पीड़ित को धमकाना शुरू कर दिया। कहा गया कि उनका नाम दिल्ली ब्लास्ट केस में सामने आया है और किसी भी समय गिरफ्तारी हो सकती है। यह सुनते ही बुजुर्ग अधिकारी बुरी तरह डर गए।

"किसी को मत बताना", इसी से शुरू हुआ खेल

इसके बाद ठगों ने इसे नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ा सेंसिटिव मामला बताया और पीड़ित को सख्त हिदायत दी कि वह किसी को भी इसकी जानकारी न दें। इसी गोपनीयता के जाल में फंसकर पीड़ित ने ठगों की हर बात मान ली।

मोबाइल में ऐप इंस्टॉल कराकर वीडियो कॉल

साइबर ठगों ने पीड़ित को एक मोबाइल ऐप इंस्टॉल करने को कहा, जिसके जरिए वीडियो कॉल की गई। वीडियो कॉल में एक व्यक्ति मौजूद था, जिसने खुद को NIA अधिकारी बताया और भरोसा जीत लिया।

मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप

ठगों ने दावा किया कि एक बैंक अकाउंट पीड़ित के मोबाइल नंबर से लिंक है, जिसमें 7 करोड़ रुपये मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए आए हैं। गिरफ्तारी की धमकी देकर पीड़ित को और ज्यादा डरा दिया गया।

वेरिफिकेशन के नाम पर कराए पैसे ट्रांसफर

इसके बाद पीड़ित से बैंक बैलेंस और निवेश की जानकारी ली गई और कहा गया कि जांच के लिए रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर करनी होगी। भरोसा दिलाया गया कि निर्दोष पाए जाने पर पूरी रकम वापस मिल जाएगी।

16.50 लाख ट्रांसफर होते ही नंबर ब्लॉक

पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में 16.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद कॉलर ने नंबर ब्लॉक कर दिया। तब जाकर पीड़ित को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

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