Raghav Chadha (Source. X) 
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राघव चड्ढा पर बड़ा झटका, 1 दिन में 10 लाख फॉलोअर्स गायब, फिर फेक फॉलोअर्स का खेल उजागर

Raghav Chadha Social Media: राजनीति और सोशल मीडिया का रिश्ता आज बेहद गहरा हो चुका है। इसी बीच राघव चड्ढा को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। जो उनके सोशल मीडिया फॉलोअर्स को लेकर है।

सिमरन सिंह

Raghav Chadha Social Media Fake Followers: राजनीति और सोशल मीडिया का रिश्ता आज बेहद गहरा हो चुका है। इसी बीच राघव चड्ढा को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। खबर है कि आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी जॉइन करने के ऐलान के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा। घोषणा के तुरंत बाद इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स तेजी से घटने लगे और देखते ही देखते एक ही दिन में करीब 10 लाख लोग उन्हें अनफॉलो कर गए। यह ट्रेंड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

क्या है पूरा मामला?

जैसे ही यह खबर सामने आई, उनके कई पुराने समर्थकों ने नाराजगी जतानी शुरू कर दी। इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर लगातार क्रिटिसिज्म बढ़ने लगा, जिससे उनके अकाउंट की फॉलोअर संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। आज के दौर में राजनीतिक नेताओं के लिए सोशल मीडिया इमेज बेहद अहम होती है, क्योंकि यहीं से वे सीधे जनता से जुड़ते हैं। ऐसे में फॉलोअर्स का कम होना उनकी पब्लिक इमेज पर असर डालता है।

फेक फॉलोअर्स का खेल कैसे शुरू हुआ?

फॉलोअर्स कम होने के बाद अचानक उनके अकाउंट पर तेजी से नए फॉलोअर्स जुड़ने लगे। सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स का दावा है कि इनमें से कई फॉलोअर्स असली नहीं, बल्कि बॉट अकाउंट्स थे। बताया जा रहा है कि इमेज को संभालने के लिए थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म्स के जरिए लाखों फेक फॉलोअर्स जोड़े गए, ताकि यह दिखाया जा सके कि उनकी लोकप्रियता अब भी बरकरार है।

क्या होते हैं फेक या बॉट फॉलोअर्स?

फेक या बॉट फॉलोअर्स ऐसे अकाउंट होते हैं जिन्हें असली लोग इस्तेमाल नहीं करते। ये सिर्फ संख्या बढ़ाने के लिए बनाए जाते हैं। आजकल टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कई चैनल्स मौजूद हैं, जो कुछ रुपये में हजारों फॉलोअर्स बढ़ाने का दावा करते हैं। कई बार स्कैमर्स लोगों को पैसे देकर उनसे बल्क में अकाउंट फॉलो करवाते हैं, जिससे संख्या अचानक बढ़ जाती है।

कैसे पहचानें फेक फॉलोअर्स?

फेक फॉलोअर्स को पहचानना ज्यादा मुश्किल नहीं है। अगर किसी अकाउंट में ऐसे प्रोफाइल्स की भरमार हो जिनकी न प्रोफाइल फोटो हो, न पोस्ट और न ही कोई खास एक्टिविटी तो समझ जाइए कि वे बॉट अकाउंट्स हो सकते हैं। राघव चड्ढा के मामले में भी ऐसे ही अकाउंट्स सामने आए, जिनमें ज्यादातर इसी महीने बनाए गए थे और उनमें कोई एक्टिविटी नहीं थी।

बढ़ी बहस और उठे सवाल

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। फेक फॉलोअर्स जोड़ने की खबर ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग अब सिर्फ राजनीतिक फैसलों पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की सच्चाई पर भी चर्चा कर रहे हैं। यह मामला साफ दिखाता है कि डिजिटल दुनिया में दिखने वाली हर चीज असली नहीं होती।

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