Fire Accidents By AC Or Cylinder: दिल्ली में कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) के पहले चेयरमैन धनेंद्र कुमार की घर में आग लगने से हुई मौत ने एक बार फिर घरेलू आग हादसों की गंभीरता को सभी के सामने लाकर खड़ा कर दिया है। वैसे तो शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि आग की वजह एयर कंडीशनर में आई तकनीकी खराबी हो सकती है। लेकिन अंतिम रिपोर्ट अभी आना बाकी है पर उससे पहले ही इस घटना ने देशभर में बढ़ते आग हादसों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जैसा की सभी को पता है कि गर्मी के मौसम में AC, बिजली के उपकरण और गैस सिलेंडर से जुड़े हादसों में बढ़ोतरी होती है लेकिन अब आए आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या सिर्फ व्यक्तिगत लापरवाही नहीं बल्कि बड़ा सुरक्षा मुद्दा बन गई है।
नेशनल सेफ्टी डेटा में देखा गया की साल 2005 से 2024 के बीच भारत में आग लगने के 3,43,206 मामले दर्ज किए गए। जिसमें से कई हादसों में हर साल औसतन 16,393 लोगों की जान जाती है। जिसको लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू आग की घटनाओं में सबसे बड़ी भूमिका गैस सिलेंडर लीकेज, शॉर्ट सर्किट और खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की ही देखी गई है। वहीं यह भी देखा गया है कि कई मामलों में शुरुआती चिंगारी छोटी होती है लेकिन समय पर हादसा ना रोक पाने के कारण वह बड़ी बन जाती है।
| अवधि | कुल आग हादसे | औसत वार्षिक मौतें |
|---|---|---|
| 2005-2024 | 3,43,206 | 16,393 |
| 2026 | AC ब्लास्ट के 7 बड़े मामले | जांच जारी |
वहीं इस साल 2026 के आकंड़ों को देखे तो अभी तक देशभर में एयर कंडीशनर ब्लास्ट से जुड़ी आग के 7 बड़े हादसे सामने आ चुके हैं। जिसका कारण भीषण गर्मी में AC का लगातार लंबे समय तक इस्तेमाल है। जिससे AC में ओवरलोडिंग, वायरिंग फॉल्ट और कंप्रेसर फेल होने जैसी समस्याएं आती है। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि हर आग का कारण AC नहीं होता। देश के घरों में कई मामलों में सिलेंडर ब्लास्ट, खराब वायरिंग या अन्य इलेक्ट्रिकल फॉल्ट भी जिम्मेदार बनते है।
हाल के समय में देखा गया है कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और ओडिशा में आग से जुड़ी घटनाओं में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। वहीं यह आकड़ा विशेष रूप से महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में 2024 तक आग की घटनाओं के आंकड़े को देखने के बाद चिंता बढ़ाता है। वहीं एक वजह तेजी से बढ़ते शहरीकरण, पुराने बिजली नेटवर्क और घरेलू उपकरणों के बढ़ते उपयोग को भी माना जा रहा है।
| राज्य | 2020 | 2021 | 2022 | 2023 | 2024 |
| महाराष्ट्र | 8.2 | 9.1 | 10.3 | 9.8 | 10.5 |
| तमिलनाडु | 8.0 | 7.7 | 6.7 | 8.1 | 8.4 |
| उत्तर प्रदेश | 3.9 | 4.6 | 7.0 | 5.8 | 8.1 |
| मध्य प्रदेश | 15.3 | 13.9 | 11.1 | 8.6 | 7.7 |
| ओडिशा | 13.8 | 14.7 | 16.2 | 14.6 | 7.4 |
5 राज्यों में घटनाओं कीं सर्वाधिक बढ़ोतरी
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| कारण | जोखिम स्तर |
| गैस सिलेंडर लीकेज/ब्लास्ट | बहुत अधिक |
| शॉर्ट सर्किट | बहुत अधिक |
| AC ओवरलोडिंग या तकनीकी खराबी | अधिक |
| खराब वायरिंग | अधिक |
| इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का ओवरहीट होना | मध्यम |
इस तरह के मामलों को देखने के बाद विशेषज्ञ सभी को यह सलाह देते हैं कि AC की नियमित सर्विसिंग, ओवरलोडिंग से बचाव, अच्छी क्वालिटी की वायरिंग और गैस सिलेंडर का समय-समय पर जांच करना इनको कम कर सकता है। ऐसे में गर्मी के बढ़ते दौर में तकनीकी का सहारा लेना गलत नहीं है लेकिन परिवार की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना जरूरी है।