BCCI Preparing Future Pacers in COE: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) देश में तेज गेंदबाजी को उभारने के लिए 22 गेंदबाजों का कैंप लगाया। 28 अगस्त से दलीप ट्रॉफी की शुरुआत होने जा रही है। उससे पहले बीसीसीआई ने बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में फास्ट बॉलिंग डेवलपमेंट कैंप लगाया।
रविवार को बीसीसीआई ने एक वीडियो शेयर किया जिसमें 22 चुनिंदा और अंडर-19 तेज गेंदबाज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग करते दिखे। ये खिलाड़ी तेज़ गेंदबाज़ी कोच ट्रॉय कूली की देखरेख में फिटनेस, गेंदबाज़ी की तकनीक और रणनीति से जुड़ी ट्रेनिंग कर रहे हैं। इन 22 तेज गेंदबाजों में 14 वो गेंदबाज है, जिनपर बीसीसीआई नजर बनाए हुए हैं। वहीं 8 अंडर-19 के तेज गेंदबाजों का शामिल किया गया।
पिछले कुछ दशकों में भारत की तेज गेंदबाज़ी लगातार बेहतर होती गई और टेस्ट क्रिकेट में इसका असर रवि शास्त्री और भरत अरुण की कोचिंग के दौरान देखने को मिला, जिसमें कप्तान विराट कोहली का भी अहम योगदान था। हाल ही में इंग्लैंड में खेले गए एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के दौरान तेज गेंदबाज़ी फिर से चर्चा में रही, जब आकाश दीप और अर्शदीप सिंह के चोटिल होने के बाद टीम को अंशुल कम्बोज को घर से बुलाना पड़ा। हरियाणा के इस गेंदबाज का डेब्यू कुछ खास नहीं रहा।
रविवार को बीसीसीआई ने 'एक्स' पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें बताया गया कि बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में 14 टारगेटेड और 8 अंडर-19 तेज गेंदबाज़ों ने फास्ट बॉलिंग डेवलपमेंट प्रोग्राम में हिस्सा लिया। यह पहल पिछले कुछ वर्षों से तेज गेंदबाज़ों को तैयार करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। इस कैंप में खिलाड़ियों ने फिटनेस, गेंदबाज़ी कौशल और रणनीतिक सोच पर काम किया। पूरा प्रशिक्षण बीसीसीआई के तेज़ गेंदबाज़ी कोच ट्रॉय कूली की देखरेख में हुआ, जिससे खिलाड़ियों को आगामी सीजन के लिए तैयार किया जा सके।
यह भी पढ़े: T20 Asia Cup: इस खिलाड़ी के नाम दर्ज है अनचाहा रिकॉर्ड, हार्दिक पांड्या भी लिस्ट में शामिल
वीडियो में इंग्लैंड में टेस्ट डेब्यू करने वाले हर्षित राणा और अंशुल कंबोज भी नजर आए। इनके अलावा सिमरजीत सिंह, तुषार देशपांडे, सूर्यांश शेडगे, गुरजपनीत सिंह और युद्धवीर सिंह चरक जैसे युवा गेंदबाज भी कैंप का हिस्सा थे। कैंप में सुयश शर्मा और श्रेयस अय्यर की मौजूदगी ने यह संकेत भी दिया कि ये खिलाड़ी अपनी फिटनेस पर काम कर रहे हैं। बीसीसीआई को उम्मीद है कि इस पहल से भविष्य में बुमराह, शमी और सिराज जैसे गेंदबाज़ों के विकल्प तैयार किए जा सकेंगे। खासकर जब बुमराह के वर्कलोड मैनेजमेंट जैसी चुनौतियां सामने हों।