भारतीय तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज सोर्स- सोशल मीडिया
खेल

125 की स्पीड से 140 तक का सफर, मैनचेस्टर में फ्लॉप होने वाले अंशुल कंबोज ने ऑकलैंड में कैसे मचाया तहलका?

Anshul Kamboj Bowling: भारतीय तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज ने न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड वनडे में अपनी रफ्तार और सटीक लाइन-लेंथ से तहलका मचा दिया है। आइए जानते है उनकी गेंदबाजी के सफलता के राज।

राहुल उपाध्याय

Highlights:

  • अंशुल कंबोज ने न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड वनडे में मचाया तहलका

  • अंशुल को मैनचेस्टर टेस्ट में धीमी रफ्तार के कारण आलोचना झेलना पड़ा

  • अंशुल गेंदबाजी करते हुए केवल 22 रन खर्च किए और 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए

Anshul Kamboj bowling speed: भारतीय क्रिकेट टीम को एक नया स्विंग और स्पीड स्टार मिल गया है। हरियाणा के 25 वर्षीय तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज ने न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड वनडे में अपनी घातक गेंदबाजी से विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी।

मैनचेस्टर टेस्ट में धीमी रफ्तार (125 kmph) के कारण आलोचना झेलने वाले अंशुल ने न सिर्फ अपनी गति को बढ़ाकर 140 kmph किया, बल्कि ऑकलैंड में 'प्लेयर ऑफ द मैच' का खिताब जीतकर आलोचकों को करारा जवाब दिया है।

ऑकलैंड में अंशुल का जादुई स्पेल

न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड वनडे में अंशुल कंबोज टीम इंडिया की जीत के सबसे बड़े हीरो साबित हुए। उन्होंने अपने 10 ओवर के कोटे में बेहद कंजूसी से गेंदबाजी करते हुए केवल 22 रन खर्च किए और 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए।

इस दौरान उन्होंने 2 ओवर मेडन भी डाले। अंशुल की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि उन्होंने कीवी बल्लेबाजों को हाथ खोलने का कोई मौका नहीं दिया और लगातार सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी कर दबाव बनाए रखा।

मैनचेस्टर टेस्ट की नाकामी, फिर...

दरअसल, अंशुल कंबोज का अंतरराष्ट्रीय करियर का सफर आसान नहीं रहा है। जुलाई 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट में उन्हें चोटिल अर्शदीप सिंह (उंगली में चोट) की जगह अचानक टीम में शामिल किया गया था।

टीम मैनेजमेंट को उम्मीद थी कि अंशुल 135 से 140 kmph की रफ्तार से गेंदबाजी करेंगे, लेकिन वहां दबाव में उनकी गति घटकर महज 125 किलोमीटर प्रति घंटे रह गई थी। इस खराब प्रदर्शन से उनके बचपन के कोच सतीश राणा भी हैरान थे।

रन-अप छोटा किया और घंटों बहाया पसीना

मैनचेस्टर में मिली नाकामी के बाद अंशुल टूटे नहीं, बल्कि उन्होंने सुधार की राह चुनी। कोच सतीश राणा ने जब मैनचेस्टर टेस्ट के वीडियो का बारीकी से विश्लेषण किया, तो पाया कि अंशुल का रन-अप अपनी लय में नहीं था। इसके बाद सुधार का यह कड़ा सिलसिला शुरू हुआ।

रन-अप में बदलाव: कोच ने अंशुल के रन-अप को करीब दो गज (Two Yards) छोटा किया, जिससे उन्हें बेहतर बैलेंस मिला।

फिटनेस पर फोकस: गेंदबाजी लय को वापस पाने के लिए उनकी कोर स्ट्रेंथ और फिटनेस पर कड़ा काम किया गया।

सटीक लेंथ की ट्रेनिंग: अंशुल ने अपनी पुरानी रफ्तार हासिल करने के लिए नेट्स पर घंटों तक एक ही सटीक लेंथ पर लगातार गेंद डालने का अभ्यास किया।

टीम मैनेजमेंट का भरोसा आया काम

इस पूरी कहानी में भारतीय टीम मैनेजमेंट की भूमिका भी सराहनीय रही। अमूमन देखा जाता है कि एक या दो खराब मैचों के बाद युवा खिलाड़ियों को टीम से ड्रॉप कर दिया जाता है, लेकिन मैनेजमेंट ने अंशुल कंबोज की प्रतिभा पर पूरा भरोसा बनाए रखा।

उन्हें अपनी कमियों को सुधारने का पूरा समय और मौका दिया गया, जिसका नतीजा आज दुनिया के सामने ऑकलैंड में शानदार 'प्लेयर ऑफ द मैच' प्रदर्शन के रूप में है।

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