India Youth Skill Gap: युवाओं की बेरोजगारी देश की ज्वलंत समस्या है। इस संबंध में नीति आयोग का कहना है कि युवाओं के पास डिग्री तो है पर स्किल नहीं। सवाल यह है कि स्कूल-कॉलेजों के सिलेबस या पाठ्यक्रम में किताबी ज्ञान तो रहता है, लेकिन जरूरी हुनर नहीं सिखाया जाता। युवाओं को डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने के बाद नौकरी के लिए अलग से ट्रेनिंग लेनी पड़ती है।
नीति आयोग की रीइमेजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित भारत 2047 शीर्षक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 15 से 29 आयुवर्ग के करीब 8.7 करोड़ युवा ऐसे हैं, जो न पढाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं। 8.25 प्रतिशत स्नातकों को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी नहीं मिल रही है जबकि 80 फीसदी युवाओं को प्रैक्टिकल अनुभव या इंडस्ट्री एक्सपोजर नहीं है। 34 प्रतिशत में स्किल गैप है। नौकरियां बहुत कम हैं।
नवंबर 2014 से जुलाई 2025 के बीच 55,000 पदों के लिए 1.86 करोड़ आवेदन आए थे। यदि विश्लेषण करें तो बेरोजगारी की एकमात्र वजह कमजोर शिक्षा व्यवस्था नहीं है। स्वीडन और फिनलैंड में भारत की तुलना में बेहतर शिक्षा प्रणाली है, लेकिन वहां भी बेरोजगारी की समस्या बनी हुई है। केरल में शिक्षित वर्कफोर्स है, लेकिन युवा बेरोजगारी बहुत ज्यादा है।
यहां के युवा काम करने खाड़ी देशों में जाते हैं। यह भी प्रश्न उठता है कि यदि भारत में शैक्षणिक योग्यता व हुनर की कमी है, तो कुशल श्रमिकों का वेतन बढ़ना चाहिए मगर ऐसा होता दिखाई नहीं देता। एआई सक्षमता से जुड़ी कंपनियों में भी विदेश की तुलना में वेतनमान कम है। अर्थव्यवस्था में सुस्ती आने की वजह से श्रमिकों की मांग कम हो रही है। सार्वजनिक क्षेत्रों में निवेश घट रहा है। दूसरी ओर निजी निवेश नहीं बढ़ा है।
भारत में लगभग 1 दशक से ग्रामीण श्रमिकों की आय नहीं बढ़ी है। उत्पादन बढ़ाने के लिए शिक्षा व हुनर दोनों की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन तथ्य यह है कि अर्थव्यवस्था का सीधा संबंध मांग से है।
मांग और उपभोग बढ़ेगा, तो उद्योगों को अधिक मानव बल या कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। देश के 11 में से 7 प्रमुख सेक्टरों में राष्ट्रीय आय घटी है। 2 सेक्टर पहले की तरह स्थिर हैं। केवल 1 सेक्टर रीयल इस्टेट ऐसा है, जो बढ़ता जा रहा है।
यह बहुत सारे लोगों को रोजगार नहीं देता। 2016 के मुद्रा अवमूल्यन के बाद से अर्थव्यवस्था में मंदी आई। इसके बाद 2020-21 में कोविड की वजह से अगला झटका लगा। लॉकडाउन खत्म होने के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार आया लेकिन उसकी विकास दर में तेजी नहीं आई।
मोदी सरकार ने 2019 में नई कंपनियों के लिए टैक्स घटाए, लेकिन निजी निवेश नहीं बढ़ पाया। अब तो खाद्य कीमतें भी 2008-09 की तुलना में 53 फीसदी बढ़ गई हैं। बेरोजगारी की व्यापक समस्या का कोई हल नहीं निकल पा रहा है।