Vinod Tawde BJP Election Strategist: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को पार्टी के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में गिना जाता है। संगठन और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में लंबे अनुभव के चलते उन्हें विभिन्न राज्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाती रही हैं। तावड़े को 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने विभिन्न राज्यों में सहयोगी दलों और समर्थन देने वाले दलों के साथ समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन के लिए भी उन्हें चुनाव प्रभारी बनाया गया।
संगठन के स्तर पर तावड़े ने हरियाणा के प्रभारी के तौर पर पार्टी को मजबूत करने में भूमिका निभाने का कार्य किया। 2022 में बिहार की जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने राज्य के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का गहन अध्ययन किया। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी वह भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल रहे।
चुनाव से पहले उनके नेतृत्व में सामाजिक और जातीय समीकरणों को लेकर व्यापक स्तर पर रणनीति तैयार की गई थी। जिसकी वजह से वहां आजाद भारत में पहली बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाने में भी कामयाब रही। वर्ष 2024 में 'संगठन पर्व' के तहत सदस्यता अभियान की राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी तावड़े को मिली।
पार्टी के अनुसार, इस अभियान में भाजपा ने 15 दिनों में 5 करोड़ सदस्यों को जोड़ने का लक्ष्य हासिल किया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक चुनाव कराने, विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार करने तथा मुख्यमंत्री चयन से जुड़े मामलों में भी
उन्होंने जिम्मेदारियां निभाई। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने स्टार प्रचारकों के दौरे की रणनीति तैयार करने में भी भूमिका अदा की। गुजरात, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, उत्तराखंड और दिल्ली समेत कई राज्यों में चुनावी संचालन से जुड़े दायित्व उनके पास रहे हैं।
2026 के केरल विधानसभा चुनाव में भी तावड़े को चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। केरल में भाजपा के चुनाव अभियान के लिए उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 160 नेताओं को जुटाने वाली टीम का नेतृत्त्व किया था। तावड़े पार्टी के अभियानों को राष्ट्रीय स्तर पर संचालित करने का भी अनुभव रखते हैं।
'मन की बात', 'हर घर तिरंगा', चंद्रयान मिशन और 'मेरी माटी मेरा देश' जैसे अभियानों में उन्होंने समन्वय की जिम्मेदारी का निवर्हन किया है। 'ऑपरेशन गंगा' के दौरान यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी के प्रयासों और उनके परिजनों से संवाद में भी उन्होंने भूमिका निभाई थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और स्वामित्व योजना जैसी सरकारी योजनाओं के राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन की निगरानी से जुड़े दायित्व भी उन्होंने संभाले हैं।
महाराष्ट्र से आने वाले तावड़े अब राज्यसभा सदस्य भी हैं और वित्त संबंधी स्थायी समिति तथा विदेश मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य के रूप में काम कर रहे हैं। संगठन, चुनाव प्रबंधन और गठबंधन समन्वय में उनके अनुभव ने उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण रणनीतिकारों में स्थापित किया है।
भाजपा के चुनावी रणनीतिकार
जाता है, जो किसी को माद्दा रखना शामिल है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में एक बार फिर विनोद तावड़े को महासचिव का पद दिया गया है। उनको इस समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सबसे करीबी लोगों में माना जाता है। इसकी वजह यह बताई जाती है कि तावड़े के पास वह सभी गुण हैं। जो एक कुशल नेता में होने चाहिए।
इसमें संगठन विस्तार की क्षमता, चुनावी रणनीति बनाने की कला के साथ ही इस बात की समझ रखना भी है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व किस दिशा में चुनाव को आगे ले जाना चाहता है। उनको इस समय की राजनीति में प्रमोद महाजन शैली का अकेला नेता माना भी अपने साथ मिलाने, उसे साथ लाने और अकेले भी बहुमत जुटाने का
-लेख संतोष ठाकुर के द्वारा