Venezuela Earthquake Tectonic Plates Disaster: यदि मानव प्रकृति से खिलवाड़ करेगा तो वह भी अपना रौद्र रूप दिखाते हुए बदला लेती है। बड़े बांधों का निर्माण, अनियंत्रित शहरीकरण, बढ़ता उत्खनन जैसी गतिविधियां भूकंप जैसी भीषण आपदा को न्योता देती हैं। वेनेजुएला में 24 जून को दो भयावह भूकंप 7.2 व 7.5 तीव्रता के आये उनके कारण 10,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा बैठे हैं और बहुमंजिला इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं। वेनेजुएला के मुख्य अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को इतना गंभीर नुकसान पहुंचा है कि उसे बंद करना पड़ गया है। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेलसी रोड्रिग्स ने देश में आपातस्थिति घोषित की है।
यूएस जियोलाजिकल सर्वे ने कहा है कि बहुत बड़ी संख्या में लोग मरे हैं और जबरदस्त नुकसान हुआ है। उसके मुताबिक 'यह आपदा बहुत दूर तक फैली हुई है'। भूकंप ने काराकास के पश्चिम क्षेत्र में हिट किया और उसके झटके न सिर्फ पूरे वेनेजुएला में महसूस किये गए बल्कि दूर बोगोटा, कोलोम्बिया से भी नुकसान की खबरें आई हैं। मृतकों की संख्या इस वजह से भी अधिक हो सकती है क्योंकि वेनेजुएला राष्ट्रीय छुट्टी मना रहा था और अधिकतर लोग अपने घरों पर ही थे।
लैटिन अमेरिका के नेताओं ने मदद व सहयोग की पेशकश की है और राहत सामग्री व रेस्क्यू टीमें भेजी हैं। यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मदद भेजने का वायदा किया है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकले ने कहा है कि उनके देश ने 50 टन राहत सामग्री और 300 व्यक्तियों का बचाव दल तैयार किया है, जो काराकास के लिए जाने वाला है।
सवाल है वेनेजुएला में इतनी तीव्रता के ये दो भूकंप क्यों? दरअसल जहां वेनेजुएला स्थित है, वहां दो टेकटोनिक प्लेट्स- करीबीयन व साउथ अमेरिकन मिलती हैं। जो दूसरा बड़ा भूकंप आया, यूएस जियोलाजिकल सर्वे के अनुसार, वह इन दोनों प्लेट्स की सीमा के निकट 'शेलो स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग' का नतीजा था। यह तब होता है, जब प्लेट्स के बीच में फॉल्ट्स या फ्रैक्चर हॉरिजॉन्टली चलते हैं। भूकंप के बाद जो अक्सर झटके आते हैं, वह भी खासी तीव्रता के होंगे। बाद के 20 से अधिक झटके आ चुके हैं। इनकी वजह से लोग सड़कों व खुले मैदानों में निकले हुए हैं, अपने घरों में जाते हुए डर रहे है, दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। इस बार के भूकंप उथले थे (10-13 किमी गहराई), इसलिए उनका प्रभाव अधिक था। उथले भूकंप सतह पर ज्यादा कम्पन पैदा करते हैं। यह क्षेत्र सदियों से सक्रिय है। 1812 व 1900 में भी काराकास के आसपास 7 से ज्यादा की तीव्रता के भूकंप आये थे।
इस बार जो दो लगातार भूकंप आये वह पिछले 100 वर्ष के दौरान सबसे अधिक तीव्रता के थे, इसलिए सुनामी का भी अलर्ट जारी किया गया, जिसे बाद में वापस ले लिया गया क्योंकि कोई बड़ी सुनामी नहीं आयी। सुनामी हमेशा नहीं आती है; यह इस बात पर निर्भर करता है कि भूकंप कितना उथला था, फाल्ट की दिशा क्या थी और समुद्र तल कितना प्रभावित हुआ। लेकिन चिंता इस बात की है कि इस प्लेट बाउंड्री का बड़ा हिस्सा 'लॉक्ड' है यानी तनाव जमा हो रहा है, जो 8 तीव्रता तक के भूकंप पैदा कर सकता है। इस तीव्रता का अगर भूकंप आ जाता है तो तबाही का अंदाजा लगाकर भी रूह कांप जाती है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि वेनेजुएला बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है।
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केलिफोर्निया के नीचे 1000 साल से प्रेशर जमा हो रहा है, जिससे किसी भी समय 'महा-भूकंप' आ सकता है और पूरे लास एंजेल्स को बर्बाद कर सकता है। नेपाल व उससे सटे क्षेत्रों, तुर्की, ईरान आदि में भूकंप की भयावह तबाही को हम देख चुके हैं और जापान के समुद्र से जो सुनामी उठी थी, उसने तो श्रीलंका तक मौत का तांडव मचाया था।
भूकंप, सुनामी या अन्य प्राकृतिक आपदाएं कहीं भी और कभी भी आ सकती हैं। वेनेजुएला की घटना पुरानी इमारतों और भूकंप प्रतिरोधी कमजोरियों को उजागर कर रही है। वेनेजुएला पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में राहत व पुनर्निर्माण भी बड़ी चुनौती रहेंगे। सभी देश वेनेजुएला की घटना से सबक लें और अपने यहां की तैयारियों को मजबूत करें। भूकंप के आने का पहले से अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन बेहतर बिल्डिंग कोड, जागरूकता और आपात योजना से नुकसान कम किया जा सकता है।
लेख- शाहिद ए चौधरी के द्वारा