लेख में ट्रंप की नीतियों की तुलना मोहम्मद तुगलक के फैसलों से की गई है।
रूस, चीन और भारत को लेकर ट्रंप के बदलते रुख पर सवाल उठाए गए हैं।
अमेरिकी टैरिफ और एच-1बी वीजा फीस से भारत की चिंताएं बढ़ने का मुद्दा उठाया गया है।
Trump Tariffs Russia China India Relations: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, पता नहीं सत्ता में सनकी लोग कैसे आ जाते हैं! प भारत के इतिहास में मोहम्मद तुगलक जैसा सनकी बादशाह हुआ था। उसने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद ले जाने का फैसला किया और सारे दिल्लीवासियों को दक्षिण भारत शिफ्ट होने का हुक्म दिया। रास्ते में हजारों लोग भूख-प्यास से मर गए। उसने तांबे और पीतल के सिक्के चलवाए जिनका मूल्य चांदी के सिक्के के बराबर कर दिया। इससे चांदी गायब हो गई। लोग नकली सिक्के ढालने लगे जिससे अर्थव्यवस्था चौपट हो गई। तुगलक ने गंगा-यमुना के उपजाऊ क्षेत्र में लगान बहुत ज्यादा बढ़ा दिया। इसलिए किसान खेती छोड़कर भाग गए और अकाल पड़ गया। उसने हिमालय की तलहटी में स्थित कांगड़ा में फौज भेजी। वहां खराब मौसम, दुर्गम रास्ते और महामारी से अधिकांश सेना नष्ट हो गई।'
हमने कहा, 'यह जमाना तुगलक का नहीं, ट्रंप का है! वह भी सुपर सनकी हैं। ट्रंप ने रूस से तेल लेने की वजह से भारत पर भारी पेनाल्टी लगाई लेकिन जब अमेरिका में डीजल के दाम 80 प्रतिशत बढ़ गए और किसान व ट्रकचालक नाराज होने लगे तो ट्रंप ने रूस से डीजल खरीदी शुरू कर दी। यह दोहरी नीति नहीं तो और क्या है? ट्रंप चीन को आदिम युग का बर्बर कहते थे, लेकिन जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका पहुंचे तो ट्रंप ने खुद एंड्रयू एयरबेस पर उनका रेड कारपेट वेलकम किया और व्हाइट हाउस में शानदार डिनर दिया। इससे चीन के रवैये में कोई फर्क नहीं आया। ट्रंप ने इजराइल के पक्ष में ईरान से लड़ाई की लेकिन जब नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र महासभा में आए तो ट्रंप ने उन्हें व्हाइट हाउस में आमंत्रित करना तो दूर, पूछा तक नहीं!'
पड़ोसी ने कहा, 'ट्रंप को रूस का डीजल, चीन की गुडविल और भारत की टैलेंट चाहिए, उनके लिए दुनिया एक बाजार है। प्रधानमंत्री मोदी ने 'नमस्ते ट्रंप' का भव्य आयोजन अहमदाबाद के स्टेडियम में करवाया था, लेकिन ट्रंप पाकिस्तान से प्रेम दिखा रहे हैं। अदाणी के 2 वर्ष अमेरिकी कोर्ट-कचहरी में बर्बाद हो गए, टाटा ने टीसीएस का कारोबार अमेरिकी ग्राहकों के लिए बढ़ाया तो ट्रंप ने भारत के टेक्नीशियन पर एच-1 बी वीजा फीस बढ़ा दी।
ट्रंप ने यूक्रेन को रूस की रिफाइनरी पर हमला करने से मना कर दिया और पुतिन का पक्ष लेते हुए कहा कि यूक्रेनवासी चुनाव कर जेलेंस्की की बजाय नया नेता चुन लें। ट्रंप ने अभी भारत को रूस से तेल लेने की छूट दे रखी है। 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव के बाद वह फिर टैरिफ लगा सकते हैं। ट्रंप का मूड कभी भी बदल सकता है।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा