

Highlights:
पीएम मोदी ने 'मन की बात' को लोगों के प्रयासों और योगदान को नमन करने की तीर्थ यात्रा बताया।
विजयादशमी के अवसर पर शुरू हुए इस कार्यक्रम के 12 साल पूरे होने का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम ने देश के कोने-कोने से प्रेरक कहानियों को सामने लाने का काम किया है
Mann Ki Baat 139th Episode: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में इस कार्यक्रम के 12 साल के सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए 'मन की बात' देश के आम लोगों के प्रयासों को करीब से जानने और उनके योगदान को नमन करने की तीर्थ यात्रा जैसी है।
पीएम मोदी के मुताबिक, जो लोग समाज और राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित करते हैं, वे अपने आप में किसी तीर्थ से कम नहीं हैं। इस कार्यक्रम के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे ऐसे लोगों की प्रेरक कहानियां सामने आई हैं, जिनके योगदान पर आमतौर पर समाज का ध्यान नहीं जाता।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि 12 साल पहले विजयादशमी के पावन अवसर पर 'मन की बात' कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। तब से यह यात्रा लगातार जारी है। उन्होंने श्रोताओं को इस सफर का सहयात्री और मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में लोगों की अहम भूमिका रही है।
पीएम मोदी ने कहा कि 'मन की बात' उनके लिए देश के सामान्य नागरिकों के परिश्रम, पराक्रम, प्रतिबद्धता, समर्पण और सेवा-भाव का गौरवगान करने का अवसर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में सदियों से तीर्थ यात्रा की परंपरा रही है और उनके लिए यह कार्यक्रम भी देश के लोगों के प्रयासों को करीब से जानने तथा उनके योगदान को नमन करने की यात्रा जैसा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि समाज और राष्ट्र के लिए काम करने वाले लोग अपने आप में तीर्थ के समान हैं। बीते 12 वर्षों में देश के हर कोने से ऐसे अनेक लोगों की कहानियां सामने आई हैं, जिनके असाधारण कार्यों की ओर सामान्य तौर पर समाज का ध्यान नहीं जाता।
उन्होंने कहा कि 'मन की बात' ने ऐसे अनगिनत लोगों के काम और उनकी प्रेरक कहानियों को देशवासियों तक पहुंचाने का काम किया है। इन कहानियों के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले प्रयासों को पहचान मिली है।
पीएम मोदी ने कहा कि वह इस कार्यक्रम के माध्यम से एक तरह से देश की लोकशक्ति की आराधना करते हैं। उन्हें इसके जरिए देश के हर परिवार से जुड़ने का अवसर मिलता है।
उन्होंने बताया कि उन्हें सैकड़ों ऐसे संदेश मिलते हैं, जिनमें लोग कहते हैं कि 'मन की बात' सुनते समय उन्हें ऐसा महसूस होता है, जैसे प्रधानमंत्री उनके बीच बैठकर परिवार के सदस्य की तरह उनसे संवाद कर रहे हों। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रोताओं का यह अपनापन और स्नेह उनके लिए बेहद अमूल्य पूंजी है।