नीट पेपर लीक, CBI चार्जशीट सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो
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नवभारत संपादकीय: NEET-UG पेपर लीक, तकनीकी खामियों से हुआ खेल; CBI चार्जशीट में NTA पर सवाल

NEET UG Paper Leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट में NTA की सुरक्षा व्यवस्था में खामियों के सबूत सामने आए हैं। अभिभावकों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।

अंकिता पटेल

NEET UG 2026 Scam: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई द्वारा जा तैयार की गई चार्जशीट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के कार्यकलापों में भारी धांधली को लेकर पर्याप्त सबूत पेश किए गए हैं। इस पेपर लीक को अंजाम देने वाले लोगों के अलावा वह पालक भी दोषी हैं, जिन्होने अपने बच्चों के लिए बहुत मोटी रकम देकर प्रश्नपत्र खरीदे।

यह मामला अदालत में जाएगा, लेकिन देश को इस पेपर लीक प्रकरण से आगे बढ़कर ऐसी अनैतिकता का समाधान भी खोजना होगा, जो हमारी शिक्षा प्रणाली को खोखला कर रही है। सीबीआई के आरोपपत्र से पता चला है कि एनटीए की सुरक्षा प्रणाली ढीली थी जिस वजह से तकनीक का चालाकी से इस्तेमाल कर प्रश्नपत्र लीक किए गए। पी. वी. कुलकर्णी, मनीषा मांढरे व मनीषा हवलदार ने इस पेपर लीक को अंजाम दिया।

NEET-UG पेपर लीक रोकने को तकनीकी मॉडल तैयार

नीट-यूजीसी परीक्षा के कुछ दिन पहले कुलकर्णी की आवासीय सोसाइटी में छात्र अपने पालकों के साथ उपस्थित थे। कुलकर्णी की स्पेशल कोचिंग क्लास में लोगों के आने-जाने की रिकॉर्डिंग को एक विशेष एक्सेस कंट्रोल एप से मिटा दिया गया था। लेकिन सीबीआई ने यह सारे सबूत और विवरण जुटा लिए।

अब सरकार की जिम्मेदारी है कि एनटीए के कामकाज की धांधली को रोके और सारी खामियां दूर करें। परीक्षाओं में आगे चलकर पेपर लीक न होने पाए, इसके लिए उपाय किए जा रहे हैं। नंदन नीलकेणी की अध्यक्षता में गठित विशेष समिति आधुनिक तकनीक की मदद से ऐसा मॉडेल तैयार कर रही है, जिससे इस समस्या को हल किया जा सके। इससे उम्मीद की जाती है कि आगे चलकर पेपर लीक पर अंकुश लगेगा।

पेपर लीक में खरीदार भी दोषी, नैतिकता बचाने की जरूरत

उसके साथ ही सिस्टम में बैठे लोगों तथा अभिभावकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह ईमानदारी के रास्ते पर चलें। इस समय पेपर सेट करने वाले लोगों ने धन के लोभ में पेपर लीक किए। मद्रास आईआईटी के डायरेक्टर एम। कामकोटि ने कहा कि पेपर सेट करने वालों की बेईमानी ही पेपर लीक की वास्तविक वजह रही। इसके साथ ही सीबीआई को चहिए कि वह पेपर लीक से लाभान्वित होने वाले लोगों का भी भंडाफोड़ करे। सारे देश में ऐसे अभिभावक हैं, जो अपने बच्चों के लिए बड़ी रकम देकर पेपर खरीदने को तैयार रहते हैं।

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यदि पेपर लीक करने वाले जिम्मेदार हैं, तो पेपर खरीदने वाले भी कम गुनहगार नहीं हैं। यह मामला समाज व शिक्षा क्षेत्र के पतन को दर्शाता है। किसी भी कीमत पर सफलता हासिल करने के लिए नैतिक मूल्यों व ईमानदारी को ताक पर रख दिया जाता है।

पेपर लीक एक आपराधिक कृत्य है, लेकिन पेपर सेटर्स के अलावा वह छात्र व उनके अभिभावक भी दोषी हैं जिन्होंने मोटी रकम देकर पेपर खरीदा। इस प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगाना होगा। ऐसा नहीं होने पर समाज अपने आदर्श व जीवनमूल्य खो बैठेगा।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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