

CJP Protest Elderly Man Death: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई स्थित शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान एक दुखद हादसा सामने आया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाए गए इस प्रदर्शन में भाग लेने आए 75 वर्षीय वृद्ध गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई।
इस दर्दनाक घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारी जन-आक्रोश देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में लोग CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके से सीधे तौर पर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं तथा इंटरनेट पर अभिजीत दिपके को अरेस्ट करो का ट्रेंड तेजी से जोर पकड़ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मूल रूप से केरल के रहने वाले और वर्तमान में पड़ोसी जिले ठाणे के डोस्ती वेस्ट काउंटी (B विंग) में निवास करने वाले 75 वर्षीय गोपालकृष्ण पिल्लई शुक्रवार शाम लगभग 4:30 बजे शिवाजी पार्क में प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। शाम करीब 5 बजे, जब वे पार्क के गेट नंबर 6 के पास पहुंचे, तो उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द महसूस हुआ और वे गंभीर रूप से अस्वस्थ हो गए।
घटनास्थल पर मौजूद उनके मित्रों और वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने बिना वक्त गंवाए उनकी सहायता की। पुलिसकर्मियों ने मौके पर ही उन्हें CPR देकर होश में लाने का पूरा प्रयास किया और तुरंत उन्हें नजदीकी सुश्रुषा अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और मृत्यु का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया। पुलिस ने इस संबंध में ADR दर्ज कर ली है।
वृद्ध की मौत की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर विभिन्न यूजर्स ने CJP नेतृत्व और अभिजीत दिपके को सीधे कठघरे में खड़ा कर दिया है। लोग सवाल कर रहे हैं कि बिना अनुमति के हजारों की भीड़ जुटाने वाले आयोजक आखिर इस मौत की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी कब लेंगे?
जवाबदेही पर सीधा सवाल: एक्स पर कार्तिक (@_Muffin_Men) नामक यूजर ने लिखा कि प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति ने अपनी जान गंवा दी, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने सवाल उठाया कि CJP की जवाबदेही आखिर कहां गायब है?
पुलिस की तत्परता बनाम आयोजकों पर आरोप: गणू (@IamGanu18) नामक एक अन्य यूजर ने पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए लिखा कि पुलिस ने वृद्ध पिल्लई को बचाने के लिए त्वरित मदद की और अस्पताल पहुंचाया। लेकिन दुख की बात यह है कि इस गंभीर मोड़ पर भी आयोजक भीड़ जुटाने का जश्न मना रहे हैं और मदद करने वाली पुलिस को ही बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।
आम नागरिकों को ढाल बनाने का आरोप: यूजर्स का कहना है कि आम लोगों और बुजुर्गों को राजनीतिक फायदों तथा अराजकता फैलाने के लिए ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसकी कीमत एक वृद्ध को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
घटना के बाद पल्ला झाड़ने के आरोप: सोशल मीडिया यूजर निखिल भामरे (@The_NikhilB) ने लिखा कि आंदोलन से कोई नतीजा तो नहीं निकला, लेकिन दूर-दराज से आए व्यक्ति की मृत्यु हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मौत की खबर मिलते ही नेतृत्वकर्ता पल्ला झाड़कर निकल गए।
नेटिजन्स का स्पष्ट मानना है कि बिना पुलिस अनुमति के भारी भीड़ जुटाने और आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने के कारण यह अप्रिय घटना हुई है। इसीलिए अब जनता मुंबई पुलिस व प्रशासन से मांग कर रही है कि लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले अभिजीत दिपके और अन्य मुख्य आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और अभिजीत दिपके को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।