Mayawati Akash Anand BSP: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे प आकाश आनंद को पार्टी की सारी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया। इस पर आपकी क्या राय है?'
हमने कहा, 'आनंद या हर्ष हमेशा मुक्त ही रहना चाहिए। मराठी में कहते हैं- आनंदी आनंद गडे, जिकडे-तिकडे चोहीकडे अर्थात आनंद सर्वत्र व्याप्त होना चाहिए, यहां-वहां और चारों ओर। जमीन से लेकर आकाश तक संपूर्ण वातावरण आनंदमय हो तो कहना ही क्या! जिंदादिल व्यक्ति हमेशा आनंदित रहता है। फिल्मों में देव आनंद, चेतन आनंद और विजय आनंद रहे हैं। आपने आनंद मोहन, आनंद कुमार, आनंद प्रकाश, आनंद सिंह जैसे नाम सुने होंगे।
आनंद को अंग्रेजी में ब्लिस या हैपीनेस कहते हैं। लोग आनंद पाने के लिए तरह-तरह की खटपट या उपक्रम करते हैं। सामान्य व्यक्ति सिनेमा, नाटक, टीवी देखकर आनंद महसूस करता है। लखनऊ के नवाब मुजरा या नृत्य देखकर आनंदित होते थे। साहित्यिक प्रवृत्ति के लोग कवि सम्मेलन या साहित्य गोष्ठी में आनंद अनुभव करते हैं। खिलाड़ी को खेल में आनंद आता है। कुछ संगीत के सुरों में डूबकर आनंद पाते हैं।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हम मायावती के भतीजे आकाश आनंद की बात कर रहे हैं जिसे उन्होंने अपने से दूर कर दिया है।' हमने कहा, 'पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव में एक सीट तक नहीं मिली। अब उन्होंने खुद को आनंद से भी वंचित कर लिया। बगैर आनंद के जीवन किस काम का। ऐसा व्यक्ति गाने लगता है- तेरे बिना भी क्या जीना !'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, मायावती के भतीजे आकाश आनंद के साथ दलित वोटों का आधार है। उन्हें सपा या कांग्रेस अपने साथ ले सकती है। निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने भी आकाश आनंद को अपनी पार्टी में आने का ऑफर दिया है। आकाश आनंद चाहें तो महाराष्ट्र के रामदास आठवले के समान अपनी एक व्यक्ति की पार्टी बना सकते हैं।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा