फिल्म 'सतलुज' के प्रदर्शन पर रोक,(फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन फोटो) 
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नवभारत विशेष: फिल्म 'सतलुज' के प्रदर्शन पर रोक क्यों ? सत्य से दिक्कत क्या है?

Jaswant Khalra Case: मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा ने पंजाब में कथित अवैध दाह संस्कार और फर्जी मुठभेड़ों की जांच की। उनकी हत्या के मामले और उस पर आधारित फिल्म 'पंजाब 95' फिर चर्चा में है।

अंकिता पटेल

Punjab 95 Film Controversy: मानवाधिकार एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा को आखिरी बार उस समय देखा गया, जब सितंबर 1995 में वह अमृतसर में अपने घर के बाहर अपनी कार को धो रहे थे। बाद में पंजाब पुलिस के 6 पुलिस अधिकारियों को खालरा के अपहरण व हत्या का दोषी पाते हुए अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

खालरा के साथ ऐसा क्यों किया गया? ऑपरेशन ब्लू स्टार व तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और 1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद पुलिस को शक के आधार पर किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार दे दिया गया था। पुलिस पर आरोप था कि उसने फर्जी मुठभेड़ में निहत्थे संदिग्धों की हत्याएं कीं और इन हत्याओं को कवरअप करने के लिए हजारों शवों का दाह संस्कार किया।

खालरा पंजाब में 25,000 अज्ञात शवों के दाह संस्कार की खोजबीन कर रहे थे और साथ ही इस बात की भी कि पुलिस ने लगभग 2,000 पुलिसकर्मियों की भी हत्या की थी, जिन्होंने आतंकरोधी ऑपरेशनों में सहयोग करने से इनकार कर दिया था।

खालरा के खुलासों पर बनी फिल्म भी विवादों में घिरी

सीबीआई इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अकेले तरण तारण जिले में पुलिस ने 2,097 लोगों का अवैध दाह संस्कार किया था। 'गुमशुदा' लोगों की तलाश करते हुए खालरा के हाथ अमृतसर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से वह फाइल मिल गई, जिनमें उन लोगों के नाम, आयु व पते थे, जिनकी हत्या करके पुलिस ने दाह संस्कार कर दिया था।

खालरा के अतिरिक्त शोध से यह संख्या हजारों में पहुंच गई। संभवतः इस वजह से उन्हें 'खामोश' कर दिया गया। जसवंत सिंह खालरा के इसी एक्टिविज्म पर निर्देशक हनी त्रेहन ने फिल्म 'पंजाब 95' बनाई, जिसमें दिलजीत दोसांझ, अर्जुन रामपाल व सुविंदर विक्की मुख्य कलाकार हैं। लेकिन इस फिल्म को 2022 में जब सीबीएफसी क्लियरेंस के लिए भेजा गया, तो विवादों का सिलसिला आरंभ हो गया।

127 कट के बाद भी OTT से हटाई गई 'सतलुज'

सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 21 कट लगाने का सुझाव दिया, जिसे निर्देशक ने न चाहते हुए भी इस उम्मीद में स्वीकार कर लिया कि फिल्म को थिएटर में रिलीज करने के रास्ते साफ हो जाएंगे, लेकिन फिल्म की इसके बाद भी अनेक बार समीक्षाएं की गई और 2025 तक फिल्म में 127 कट लगाने के सुझाव दिए गए।

खालरा का नाम बदलने को भी कहा गया, जिन्हें निर्देशक ने यह कहते हुए मानने से इनकार कर दिया कि इतने कट के बाद तो मालूम ही नहीं पड़ेगा कि फिल्म किस विषय पर बनाई गई है? इसी विवाद के चलते फिल्म को सितंबर 2023 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (टीआईएफएफ) में रिलीज न किया जा सका।

निर्माताओं ने 'पंजाब 95' का नाम 'सतलुज' रखकर उसे जी-5 पर रिलीज कर दिया। लेकिन निर्देशक हनी त्रेहन की उम्मीद के अनुसार मात्र 48 घंटे बाद ही सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जी-5 से फिल्म 'सतलुज' को अपने प्लेटफार्म से हटाने का 'आदेश' दिया, जिसका त्वरित पालन किया गया।

'सतलुज' विवाद से सेंसरशिप पर फिर छिड़ी बहस

सरकार के इस फैसले से फिल्म सेंसरशिप व ओटीटी विनियमन एक बार फिर राष्ट्रव्यापी बहस के केंद्र में आ गए हैं। पंजाब में राजनीतिक दलों व सिख संस्थाओं ने 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफार्म से हटाने की निंदा व आलोचना करते हुए कहा है कि यह फिल्म राज्य (पंजाब) के 'काले अध्याय' को उजागर करती है और इतिहास का मुकाबला सेंसरशिप से दबाने की बजाय ईमानदारी से किया जाना चाहिए।

सेंसर बोर्ड 'कश्मीर फाइल्स', 'केरल स्टोरी' आदि को तो पास कर देता है, लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित फिल्मों को हरी झंडी नहीं दिखाता। शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा है, 'यह केवल सेंसरशिप नहीं है, बल्कि हमारी सामूहिक यादों, सच्चाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।' पंजाब में सत्तारूढ़ 'आप' ने भी 'सतलुज' को ओटीटी से हटाए जाने की कड़ी निंदा की है और इसे पुनः स्थापित करने की मांग की है, ताकि युवा पीढ़ी पंजाब के इतिहास को बिना 'राजनीतिक सेंसरशिप' के देख सके।

सत्य से दिक्कत क्या है?

निर्माताओं ने 'पंजाब 95' का नाम 'सतलुज' रखकर उसे जी-5 पर रिलीज कर दिया। लेकिन निर्देशक हनी त्रेहन की उम्मीद के अनुसार मात्र 48 घंटे बाद ही सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जी-5 से फिल्म 'सतलुज' को अपने प्लेटफार्म से हटाने का 'आदेश' दिवा, जिसका त्वरित पालन किया गया।

लेख-नरेंद्र शर्मा के द्वारा

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