Navabharat Nishanebaaz: रखनी है मजबूत लीडरशिप, राज्यों में मत रखो क्षत्रप

Congress Leadership History: नेहरू काल में राज्यों में ऐसे लोकप्रिय व प्रभावशाली नेता उभरे, जिनकी अपनी मजबूत राजनीतिक पहचान थी। अधिकांश स्वतंत्रता सेनानी थे व अपने प्रदेशों में व्यापक जनाधार रखते थे।
Navabharat Nishanebaaz: We have to maintain strong leadership, do not keep satraps in the states.
(फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन फोटो)
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Nehru Era Regional Leadership: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, नेहरू युग में प्रदेशों में भी लोकप्रिय और दबंग नेता हुआ करते थे। तब उत्तरप्रदेश में गोविंद वल्लभ पंत, मध्य प्रदेश में रविशंकर शुक्ल, राजस्थान में मोहनलाल सुखाड़िया, बिहार में श्रीकृष्ण सिन्हा, बंगाल में डॉ। बिधानचंद्र राय, ओडिशा में बीजू पटनायक व हरेकृष्ण मेहताब, पंजाब में प्रतापसिंह कैरो जैसे नेता थे। इनमें से अधिकांश स्वाधीनता सेनानी थे और उनका अपने क्षेत्रों में अच्छा-खासा प्रभाव था।'

हमने कहा, 'आप मोदी युग में पं. नेहरू के जमाने को क्यों याद कर रहे हैं? देश की प्रथम पंक्ति के नेताओं को आज लोग भूल चुके हैं। इस समय राजनीति में 99 प्रतिशत से भी ज्यादा पावर केंद्र सरकार के पास है। अधिकांश राज्यों का नेतृत्व बौने या मनोनीत नेताओं का है, जो सैटेलाइट टाइप के हैं। उन्हें कुछ वर्ष पहले तक कोई जानता तक नहीं था। जानबूझकर कमजोर व केंद्र से दबने वाले नेता सीएम की कुर्सी पर बिठाए गए हैं। अपना जनरल नॉलेज बढ़ाने के लिए जान लीजिए कि राजस्थान में भजनलाल शर्मा, मध्य प्रदेश में मोहन यादव, ओडिशा में मोहन चरण माझी, उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी, हरियाणा में नायबसिंह सैनी मुख्यमंत्री हैं। गुजरात में 12 वर्षों में मोदी-शाह ने कितने ही सीएम बदलकर रख दिए। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की नीति है कि राज्यों में मजबूत क्षत्रप मत रखो। ऐसा नेता रखो जिसकी अपनी आवाज न हो और जो पूरी तरह केंद्र के इशारे पर काम करे।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, इसीलिए राजस्थान में वसुंधरा राजे को सीएम नहीं बनने दिया गया और मध्य प्रदेश में बेहद लोकप्रिय हुए शिवराज सिंह चौहान को वहां से हटाकर केंद्रीय कृषिमंत्री बनाया गया। राज्यों में मुख्यमंत्री अचानक बदल दिया जाता है, जिसका कोई कारण नहीं बताया जाता। गुजरात में रूपाणी और असम से सर्वानंद सोनोवाल इसी तरह हटाए गए। बीजेपी के विधायकों-सांसदों को जताया जाता है कि वे जिस पद पर हैं, मोदी की वजह से हैं। उनकी अपनी कोई औकात नहीं है। प्रधानमंत्री खुद चुनाव प्रचार सभा में कहते हैं- उम्मीदवार कौन है, उसका चेहरा मत देखो। आप कमल पर बटन दबाओ, वोट सीधा मोदी के खाते में जाएगा, जब तक विपक्ष में बिखराव है, देश में मोदी-शाह का एकाधिकार है।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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