India-Bangladesh Diplomacy: भारत के तमाम प्रयासों के बावजूद बांग्लादेश से रिश्ते सामान्य नहीं हो पा रहे हैं। संबंधों में सुधार इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत की 4096 किलोमीटर सीमा बांग्लादेश से लगी है। चिंता इस बात की है कि वहां अब भारत विरोधी ताकतों व आतंकियों को खुली छूट दी जा रही है। उन्हें जेल से रिहा किया जा चुका है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में अल-कायदा पुनर्गठित किया जा रहा है तथा इस्लामी कट्टरपंथी संगठित हो रहे हैं जिन्हें शेख हसीना ने नियंत्रित कर रखा था। पाकिस्तान ऐसे तत्वों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है। पाकिस्तान की नीति भारत को नुकसान पहुंचाने की है। वह बांग्लादेश और चीन के साथ तिकड़ी बनाने की फिराक में है। बांग्लादेश को 80 प्रतिशत हथियारों की सप्लाई चीन से होती है। चीन भी बंगाल की खाड़ी तक अपने लिए गलियारा बनाना चाहता है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने तो चीन को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से आकर अपने बंदरगाह इस्तेमाल करने का ऑफर तक दिया था। इसके बाद भारत ने चीन व बांग्लादेश की सीमा से लगे चिकन नेक पर अपनी सुरक्षा काफी मजबूत कर दी। बांग्लादेश की ऐसी हरकतों के बावजूद भारत उसे ईंधन और बिजली की सप्लाई कर रहा है। ऐसी 54 नदियां हैं जो भारत व बांग्लादेश को जोड़ती हैं।
पश्चिम बंगाल की आपत्ति की वजह से बांग्लादेश के साथ तीस्ता नदी पानी समझौता नहीं हो सका। बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि इस वर्ष दिसंबर में समाप्त होने वाली है। इस संधि के नूतनीकरण के दौरान बांग्लादेश भारत से और अधिक पानी की मांग कर सकता है जिसे स्वीकार करना हमारे लिए कठिन है क्योंकि भारत में भी पानी की मांग बढ़ रही है। ग्लेशियर सिकुड़ने से जल प्रवाह भी घट गया है।
भारत-बांग्लादेश के बीच तनाव का बड़ा मुद्दा यह भी है कि भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को शरण दे रखी है और उन्हें वापस नहीं सौंप रहा है। जमात-ए-इस्लामी के लोग शेख हसीना की हत्या करना चाहते हैं। उन्हें वहां जाने पर सरकार फांसी या उम्रकैद की सजा दे सकती है। यदि इतने पर भी शेख हसीना स्वदेश जाना चाहें तो भारत उन्हें रोकेगा नहीं। बांग्लादेश में कोई भी सरकार हो, भारत उससे कूटनीतिक संबंध कायम रखता है। वहां आई सैनिक तानाशाही सरकार, कामचलाऊ सरकार या निर्वाचित सरकार सभी से भारत के सामान्य संबंध रहे हैं।
बांग्लादेश के लाखों लोग इलाज करवाने भारत आते हैं। उम्मीद थी कि दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान आएंगे लेकिन कट्टरपंथियों या भारत विरोधी लॉबी ने उन्हें दिल्ली जाने से रोक दिया। बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। वह बिजली, ईंधन और रसोई गैस की भारी कमी से जूझ रहा है। जूट तथा वस्त्रों का निर्यात ही उनकी आय का एकमात्र साधन रह गया है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा