Yogini Ekadashi 2026 Mantra Jaap: भगवान विष्णु की आराधना के लिए योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। सनातन हिंदू धर्म में इस एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और पापों का नाश करने वाली तिथि माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करने, व्रत रखने और उनका स्मरण करने से जीवन के कष्ट, बाधाएं और नकारात्मकता दूर होती है। साथ ही सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अगर किसी कारण से आप योगिनी एकादशी का व्रत नहीं रख पा रहे हैं, तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के कुछ अत्यंत प्रभावशाली मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से भी विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं वे 5 रहस्यमयी और दिव्य मंत्र, जिनका जाप योगिनी एकादशी पर अवश्य करना चाहिए।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
यह भगवान विष्णु का अत्यंत शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी पर इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कहा जाता है कि यह मंत्र मनोकामनाओं की पूर्ति, मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥
यदि घर में कलह रहती हो, मन हमेशा तनाव में रहता हो या जीवन में मानसिक अशांति बनी रहती हो, तो योगिनी एकादशी पर इस मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंत्र मन को स्थिरता और परिवार में सौहार्द प्रदान करता है।
नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
इसे विष्णु गायत्री मंत्र कहा जाता है। मान्यता है कि इस मंत्र का श्रद्धा से जाप करने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, पारिवारिक कलह कम होती है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं।विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्।वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्तोत्र का जाप करने से आत्मविश्वास बढ़ता है, मन में साहस आता है और भय तथा नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलने की भावना मजबूत होती है। यह भगवान विष्णु के ध्यान का अत्यंत लोकप्रिय स्तोत्र है।
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ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वभयविनाशाय सर्वरोगनिवारणाय त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्रीमहाविष्णुस्वरूप श्रीधन्वन्तरिस्वरूप श्रीश्रीश्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥
धार्मिक मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि, भगवान विष्णु के ही अवतार माने जाते हैं। इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप स्वास्थ्य, आरोग्य और भय से मुक्ति की कामना के साथ किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहा हो, तो योगिनी एकादशी पर इस मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंत्र जाप से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, भगवान विष्णु के समक्ष दीपक और तुलसी अर्पित करें तथा पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मंत्रों का उच्चारण करें। यदि संभव हो तो तुलसी की माला से 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।
नोट: उपरोक्त लाभ धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक आस्थाओं पर आधारित हैं। इन्हें आध्यात्मिक मान्यता के रूप में ही ग्रहण करें।