वर लक्ष्मी व्रत फोटो.सोशल मीडिया
धर्म

Varalakshmi Vrat Puja: 21 या 28 अगस्त? जानें पूजा विधि और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय

Varalakshmi Vrat: 21 या 28 अगस्त को लेकर क्यों है भ्रम? जानें वरलक्ष्मी व्रत की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय।

रीता राय सागर

Varalakshmi Vrat 2026: वर लक्ष्मी व्रत हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस व्रत को दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बड़े ही श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, वरलक्ष्मी मां लक्ष्मी का ही स्वरूप हैं, जो भक्तों को वरदान और समृद्धि प्रदान करती हैं। इस दिन महिलाएं परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य, सौभाग्य और समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं।

2026 में वरलक्ष्मी व्रत कब है?

साल 2026 में वर लक्ष्मी व्रत की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ पंचांग और धार्मिक स्रोत इसे 21 अगस्त 2026, शुक्रवार को बता रहे हैं, जबकि कई अन्य सोर्स 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को वर लक्ष्मी व्रत मनाया जाना बता रहे हैं।

इस अंतर की मुख्य वजह अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित पंचांग और तिथि की गणना है। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश के तिरुचानूर स्थित श्री पद्मावती अम्मावारी मंदिर ने 21 अगस्त को वरलक्ष्मी व्रत के आयोजन की जानकारी दी है। वहीं उत्तर भारत में प्रचलित कई पंचांग-आधारित कैलेंडरों में 28 अगस्त 2026 को वरलक्ष्मी व्रत बताया गया है। वरलक्ष्मी व्रत, सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के साथ बताया जा रहा है।

वर लक्ष्मी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, वर लक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी के वरलक्ष्मी स्वरूप को समर्पित है। 'वर' का अर्थ वरदान और 'लक्ष्मी' का संबंध धन-समृद्धि से माना जाता है। इसलिए इस व्रत में देवी से सुख, समृद्धि, धन-धान्य और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है।

मान्यता है कि वर लक्ष्मी की पूजा करने से अष्ट लक्ष्मी की पूजा के समान फल प्राप्त होता है। यही वजह है कि इस व्रत को विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जाता है।

कौन रखता है वर लक्ष्मी व्रत?

वर लक्ष्मी व्रत मुख्य रूप से महिलाएं रखती हैं। विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति, संतान और परिवार की सुख-समृद्धि तथा सौभाग्य की कामना के लिए इस व्रत को करती है। हालांकि, देवी लक्ष्मी की पूजा करने के इच्छुक सभी भक्त भी अपनी श्रद्धा के अनुसार इस दिन पूजा कर सकते हैं।

वरलक्ष्मी व्रत की पूजा कैसे करें?

  • व्रत के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा स्थल को साफ करके वहां चौकी स्थापित करें और उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।

  • इसके बाद कलश स्थापना करें। कलश में जल भरकर उसमें अक्षत और सुपारी आदि डालें। कलश के ऊपर नारियल रखें और उसे आम के पत्तों से सजाएं। इसके बाद मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

  • मां लक्ष्मी को कुमकुम, अक्षत, फूल, फल, मिठाई और अन्य नैवेद्य अर्पित करें। दीपक जलाकर देवी की पूजा करें और वरलक्ष्मी व्रत की कथा का पाठ या श्रवण करें। अंत में मां लक्ष्मी की आरती करें।

मां लक्ष्मी को क्या चढ़ाएं?

  • वरलक्ष्मी पूजा में मां को फूल, फल, मिठाई, नारियल, पान-सुपारी, अक्षत और कुमकुम अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर महिलाएं देवी को श्रृंगार सामग्री भी अर्पित करती हैं।

  • पूजा की सामग्री क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अपनी स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार पूजा करना उचित माना जाता है।

  • इसलिए किसी एक तारीख को पूरे भारत के लिए सार्वभौमिक रूप से सही बताने के बजाय स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत रखने की सलाह देना अधिक उचित है।

मां लक्ष्मी से करें सुख-समृद्धि की कामना

वरलक्ष्मी व्रत श्रद्धा, भक्ति और परिवार की मंगलकामना से जुड़ा पर्व है। इस दिन विधि-विधान और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार मां लक्ष्मी की पूजा कर सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है।

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