'रोहिणी व्रत' (Rohini Vrat) जैन समुदाय के सबसे शुभ त्योहारों में से एक है। इस व्रत को दुनियाभर में जैन समुदाय के लोग उत्साह के साथ मनाते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि रोहिणी व्रत रखने से घर में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और संतान की प्राप्ति होती है। इस व्रत को महिलाएं और पुरुष दोनों कर सकते हैं। हालांकि, महिलाओं के लिए यह व्रत अनिवार्य माना गया है।
जैन समुदाय के लोगों के लिए 'रोहिणी व्रत' (Rohini Vrat) विशेष महत्व रखता है। यह व्रत एक साल में बारह बार आता है यानी हर महीने में एक बार यह व्रत रखा जाता है। इस बार अगस्त महीने में पड़ने वाली 'रोहिणी व्रत'27 अगस्त 2024 मंगलवार को है।
आपको बता दें, 'रोहिणी व्रत' मुख्यतौर पर महिलाओं द्वारा यह व्रत अपने पतियों के लंबे जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। रोहिणी नक्षत्र हिंदू और जैन कैलेंडर के 27 नक्षत्रों में से एक होता है। जब सूर्योदय के बाद रोहिणी बहुत नक्षत्र प्रबल होता है, तब रोहिणी व्रत रखा जाता है।
आपको जानकारी के लिए बता दें, जैन समुदाय के लोग इसे सिर्फ साधारण व्रत ही नहीं, बल्कि त्योहार के रूप में तरह मनाते है। जैन धर्म की महिलाओं के लिए इस व्रत का पालन करना बहुत जरूरी है, लेकिन कुछ जगहों पर इस दिन पुरुष भी पूजा और व्रत करते है।
ऐसा कहा जाता है कि रोहिणी व्रत रखने से घर में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और संतान की प्राप्ति होती है। इस व्रत को महिलाएं और पुरुष दोनों कर सकते है। हालांकि, महिलाओं के लिए यह व्रत अनिवार्य माना गया है। ऐसे में आइए जानें रोहिणी व्रत से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें-
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जैन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, रोहिणी व्रत करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही यह व्रत पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए भी किया जाता है। इस व्रत को पूरे विधि-विधान के साथ करने से व्यक्ति को धन की समस्या भी नहीं सताती। जैन धर्म में इस व्रत को मोक्ष की प्राप्ति का माध्यम भी माना गया है।
रोहिणी व्रत की पूजा विधि
जैन समुदाय में यह मान्यता है कि यदि विधि-विधान के साथ रोहिणी व्रत पूजा की जाती है तो महिलाओं को अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है। भक्तों के जीवन में कभी आर्थिक दिक्कत नहीं आती है और मोक्ष की भी प्राप्ति होती है।
सीमा कुमारी