क्या है दशहरे का महत्व (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

लंका विजय से पहले भगवान श्रीराम ने की थी जिस पेड़ की पूजा, दशहरे को इसके पत्ते बांटने की महिमा जानिए

Dussehra kab hai : बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक ‘दशहरा’ का महापर्व इस बार 2 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। रामायण में जिक्र है कि भगवान राम ने लंका विजय से पहले शमी के पेड़ की पूजा की थी।

सीमा कुमारी

Dussehra 2025: दशहरा हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। जो हर साल अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को देशभर में मनाया जाता है। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक ‘दशहरा’ का महापर्व इस बार 2 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार, हम देखते हैं कि हर साल दशहरा जीतने के बाद दो पत्तियां दोस्तों, परिजनों, रिश्तेदारों को बांट कर दशहरे की शुभकामनाएं दी जाती है और बुजुर्गों से आर्शीवाद लिया जाता है। ऐसे में आइए जान लेते हैं दशहरे पर बांटी जाने वाली सोना पत्ती के महत्व के बारे में-

ज्योतिषियों के अनुसार, दशहरे पर जिन सोन पत्तियों को बांटा जाता है, इसे पौराणिक ग्रंथों में ‘शमी के पेड़ की पत्ती’ बताया गया है। रामायण में जिक्र है कि भगवान राम ने लंका विजय से पहले शमी के पेड़ की पूजा की थी।

शमी के पेड़ में भगवान कुबेर का वास

ऐसा माना जाता है कि शमी के पेड़ में भगवान कुबेर का भी वास होता है। शमी का पेड़ जीवन में सुख, समृद्धि और विजय की प्राप्ति का आशीर्वाद देता है।

शमी के पेड़ की खासियत बताई है कि यह पेड़ उस वर्ष में ज्यादा फलता-फूलता है, जिस वर्ष सूखा पड़ने वाला होता है। ऐसे में हर किसान को अपने खेत की सीमा पर शमी का पेड़ जरूर लगाना चाहिए। यह पेड़ खेती-किसानी में मौसम विपदा के बारे में पहले ही संकेत दे देता है।

पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक, सोना पत्ती शमी के पेड़ को ही कहा गया है, लेकिन मालवांचल में ‘अस्तरा’ की पत्तियों का वितरण किया जाता है। झाबुआ जिले में इसे हेतरी या सेंदरी के नाम से जाना जाता हैं। कुछ स्थानों पर सोना पत्ती के लिए कठमुली व झिंझोरी का भी इस्तेमाल किया जाता है। संस्कृत में इसे अश्मंतक, यमलपत्रक कह कर पुकारा जाता है। वास्तव में इस दौरान ऐसे पत्तों का बांटा जाता है, जिसमें दो पत्ते एक साथ जुड़े होते हैं।

जानिए क्या है दशहरे का महत्व

दशहरा हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाता है। इसी तिथि पर त्रेतायुग में भगवान श्री राम जी से दशानन रावण पर विजय प्राप्त की थी। तभी से लोग इस दिन को दशहरे के रूप में मनाते हैं।

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