Stambheshwar Mahadev Temple में क्या है खास। (सौ. yatradham) 
धर्म

दिन में दो बार गायब हो जाता है ये शिव मंदिर! 150 सालों से समुद्र कर रहा भगवान का अभिषेक

Shivling Sea Temple: शिवलिंग स्थापित होता है और श्रद्धालु दिनभर पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन क्या आपने ऐसा मंदिर देखा है, जहां भगवान शिव दिन में सिर्फ दो बार ही दर्शन देते है। ये मंदिर गुजरात में है।

सिमरन सिंह

Stambheshwar Mahadev Temple: आपने जीवन में कई शिव मंदिर देखे होंगे, जहां शिवलिंग स्थापित होता है और श्रद्धालु दिनभर पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा मंदिर देखा है, जहां भगवान शिव दिन में सिर्फ दो बार ही दर्शन देते हैं और बाकी समय पूरा मंदिर समुद्र में समा जाता है? अगर नहीं, तो आज हम आपको इसी चमत्कारिक और पौराणिक स्थल स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर से परिचित कराते हैं।

स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?

स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर गुजरात के गांधीनगर से करीब 175 किलोमीटर दूर, जंबूसर तालुका के कवि कंबोई गांव में स्थित है। यह मंदिर लगभग 150 वर्ष पुराना है और चारों ओर से अरब सागर और खंभात की खाड़ी से घिरा है। यहां आने वाले भक्तों को सुबह से रात तक रुककर समुद्र के उतार-चढ़ाव के बीच मंदिर के अद्भुत रूप के दर्शन करने पड़ते हैं। यदि सड़क पर भीड़ न हो, तो आप गांधीनगर से यहाँ तक लगभग 4 घंटे में पहुंच सकते हैं।

मंदिर की पौराणिक कथा

शिवपुराण के अनुसार, असुर ताड़कासुर ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था। प्रसन्न होकर शिव ने उसे वरदान दिया कि "उसे केवल शिवपुत्र ही मार सकेगा और पुत्र की आयु भी केवल छह दिन की होगी"। वरदान मिलते ही ताड़कासुर अत्याचार करने लगा। देवताओं और ऋषियों ने भयभीत होकर शिव से इस समस्या का समाधान करने की प्रार्थना की। तब श्वेत पर्वत कुंड से छह दिन के कार्तिकेय का जन्म हुआ और उन्होंने ताड़कासुर का वध कर दिया। लेकिन जब कार्तिकेय को पता चला कि वह शिवभक्त था, तो उन्हें गहरा दुख हुआ।

मंदिर निर्माण के पीछे की वजह

कार्तिकेय को ग्लानि से मुक्त करने के लिए भगवान विष्णु ने उन्हें सुझाव दिया कि जहां उन्होंने ताड़कासुर का अंत किया, वहीं एक शिवलिंग की स्थापना करें। इसी स्थान पर बाद में स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना हुई और तभी से यह मंदिर पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व वाला माना जाता है।

दिन में दो बार क्यों डूब जाता है यह मंदिर?

भारत में कई समुद्री मंदिर हैं, लेकिन स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी प्राकृतिक घटना के कारण सबसे अलग है। दिन में दो बार समुद्र का जलस्तर बढ़ता है और मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। जलस्तर घटते ही मंदिर फिर से दिखाई देने लगता है। भक्त इसे भगवान शिव का प्राकृतिक अभिषेक मानते हैं और इस पल का दिव्य आनंद लेने हजारों लोग यहां आते हैं।

कवि कंबोई कैसे पहुंचें?

कवि कंबोई, वडोदरा से लगभग 78 किलोमीटर दूर है। वडोदरा रेलवे स्टेशन यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। वडोदरा, भरूच और भावनगर से सड़क मार्ग द्वारा कवि कंबोई आसानी से पहुंचा जा सकता है। चाहें तो वडोदरा से प्राइवेट टैक्सी भी ली जा सकती है।

वडोदरा में घूमने की प्रमुख जगहें

वडोदरा में सयाजी बाग, वडोदरा म्यूजियम, सूरसागर तालाव, और एमएस विश्वविद्यालय पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक स्थल हैं। इसके अलावा, एल्यूमिनियम शीट से बना अनोखा EME मंदिर भी देखने लायक है।

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