Pitru Paksha Mein Shopping: पितृ पक्ष की अवधि 16 दिनों की होती है। यह समय पितरों को समर्पित है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान आदि किए जाते हैं। साथ ही, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में कुछ शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। खासतौर पर शादी-विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों को इस अवधि में करने को मना किया जाता है।
कई बार ऐसा होता है कि शादी की तैयारियों के बीच पितृ पक्ष आ जाता है तो अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि, क्या पितृ पक्ष के दौरान खरीदारी करनी चाहिए या नहीं। ऐसे में जान लेते है पितृ पक्ष में शादी की खरीदारी को लेकर क्या कहता है धर्मशास्त्र?
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, पितृ पक्ष के16 दिन हमारे पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और तर्पण-श्राद्ध करने के लिए समर्पित होते हैं। इस समय को वैराग्य और संयम की अवधि माना गया है।
इसलिए इस दौरान सगाई, शादी, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य और नया वाहन या मकान खरीदना वर्जित माना जाता है।
जहां तक शादी के लिए कपड़ों, सोने-चांदी के आभूषणों या अन्य सामान की खरीदारी का सवाल है, तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान नए वस्त्र और आभूषण खरीदने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष में खरीदी गई नई वस्तुएं पूर्वजों के प्रति ध्यान भटकाती हैं।
धर्म शास्त्रों में ये भी बताया गया है कि,यदि शादी की तारीख पितृ पक्ष के तुरंत बाद है और सामान खरीदना बहुत जरूरी है, तो ऐसे में खरीदारी की जा सकती है। इसे पितरों की प्रसन्नता और उनके आशीर्वाद के रूप में देखा जाना चाहिए कि वे परिवार को नए जीवन की शुरुआत के लिए समृद्ध कर रहे हैं।
पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाले शुभ योगों में खरीदारी करना दोषमुक्त माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान खरीदी गई किसी भी वस्तु का उपयोग पितृ पक्ष समाप्त होने और शारदीय नवरात्रि शुरू होने के बाद ही करना चाहिए।