Goddess Lakshmi And King Bali Story: हर साल सावन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन इस बार शुक्रवार, 28 अगस्त को है। आमतौर पर रक्षाबंधन भाई बहन का त्योहार है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर और माथे पर कुमकुम का तिलक लगाकर लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है।
लेकिन, रक्षासूत्र सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है। बल्कि इस दिन गुरु अपने शिष्य को भी रक्षासूत्र बांध सकते हैं। पत्नी अपने पति की कलाई पर भी रक्षासूत्र बांध सकती है।
पौराणिक कथा की मानें तो, देव राज इंद्र की कलाई पर युद्ध के समय उनकी पत्नी शचि ने रक्षासूत्र बांधा था। इसके बाद से रक्षासूत्र को संकट से बचाने और शुभता का प्रतीक माना जाने लगा।
अगर आपके पास राखी या रक्षासूत्र नहीं है, तो रेशमी धागे को भी राखी की तरह भाई की कलाई पर बांधा जा सकता है। अगर रेशमी धागा भी न हो, तो पूजा में इस्तेमाल होने वाला लाल धागा रक्षासूत्र के रूप में बांध सकते है।
अगर इनमें से कुछ भी नहीं है, तो भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और उज्ज्वल भविष्य की कामना करके रक्षाबंधन मनाया जा सकता है।
धार्मिक एवं लोक मान्यता के अनुसार, जिन बहनों का कोई भाई नहीं है, वे रक्षाबंधन पर अपने इष्टदेव को राखी बांध सकती हैं। जैसे भगवान गणेश, देवी दुर्गा, हनुमान जी, श्रीकृष्ण, श्रीराम, भगवान शिव या जिस देवी-देवता को हम अपना आराध्य मानते हैं, उन्हें राखी बांधकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की जा सकती है। पुरुष भी अपने इष्टदेव को रक्षासूत्र बांध सकते हैं। इसे भगवान के प्रति आस्था और अपनी रक्षा की प्रार्थना के रूप में देखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। जिनमें राजा बलि और भगवान विष्णु से जुड़ी कथा को खास तौर पर जाना जाता है। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दैत्यराज बलि से तीन पग जमीन मांगी। राजा बलि ने उनकी मांग स्वीकार कर ली।
इसके बाद वामन रूप में भगवान विष्णु ने अपने दो कदमों में पूरी पृथ्वी और आकाश को नाप लिया। अब तीसरा कदम रखने के लिए कोई जगह नहीं बची तो राजा बलि ने अपना सिर भगवान के सामने कर दिया।
राजा बलि की दानशीलता और समर्पण से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया और उससे वरदान मांगने को कहा। बलि ने ऐसा वरदान मांगा कि भगवान विष्णु स्वयं पाताल लोक में रहकर उसकी रक्षा करें। भगवान ने उसका वरदान स्वीकार कर लिया और पाताल लोक में रहने लगे।
दूसरी ओर काफी समय बीत जाने के बाद भी भगवान विष्णु वैकुंठ नहीं लौटे। देवी लक्ष्मी को जब इसकी जानकारी हुई तो वे उन्हें वापस लाने के लिए पाताल लोक पहुंचीं।
कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी ने राजा बलि से कहा कि मेरा कोई भाई नहीं है और वे उन्हें रक्षासूत्र बांधकर अपना भाई बनाना चाहती हैं। राजा बलि इसके लिए तैयार हो गए। देवी लक्ष्मी ने उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। इसके बाद राजा बलि ने बहन महालक्ष्मी से उपहार मांगने को कहा।
तब देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को उनके दिए हुए वरदान से मुक्त कर वैकुंठ लौटने देने की इच्छा जताई। राजा बलि ने अपना वचन निभाया और भगवान विष्णु को पाताल लोक से मुक्त कर दिया।